रविवार, 4 अक्तूबर 2020

कवि बाबूराम सिंह जी द्वारा 'हँसी' विषय पर रचना

हँसी एक रामबाण औषधि महान है
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अगुआन  जहान  बिच प्यार पहचान में ,
हँसी  एक  रामबाण  औषधि महान  है ।
दूर करे  आलस  स्वास्थ   सुधा सर्वोपरि ,
प्रभु   प्रदत   यह   अनूठा   वरदान    है ।
हर  देश काल में कमाल करता  है हँसी ,
मानव  सुजीवन  का आन  बान शान है ।
हँसी खुशी जीवन बिताये"कवि बाबूराम "
मानव   वहीं    वसुधा   पर गतिमान  है।

सर्व  सम्मति से सदा हँसी में हजार  गुण ,
यही  तो  बनाता सु निरोगी मन काया  है ।
हँसी  से  हर कार्य करता सम्पन्न जो  भी ,
सफलता  जीत  मित जग  बिच पाया  है।
कर  अपनत्व   स्थापित  सबही  से सदा ,
जन -मन   में  सदा   बहार  लहराया   है ।
नेकी भलाई  परहित  का " कवि बाबूराम "
जग  में  असल  हँसी   ही   सुचि छाया  है ।

हँसी से सम्भलता  है हर बात आपोआप ,
ताप  दुख  दाह   वहां  टिक  नही पाता है।
मायुशि   मौन   निराशा   व कायरता  को,
हँसी   ही   निरसता को  पल  में हटाता  है ।
जहां नहीं  हँसी है जाता है वहां कोई नही ,
छाता  सन्नाटा   समशान   बन  जाता   है ।
हँसी खुशियों  का बौछार " कवि बाबूराम "
जन  जीवन  का  शुभ  भाग्य विधाता   है ।

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बाबूराम सिंह कवि
बड़का खुटहाँ , विजयीपुर 
गौपालगंज (बिहार)841508
मो0नं0 - 9572105032
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