गुरुवार, 22 अक्तूबर 2020

कवयित्री सविता मिश्रा जी द्वारा 'आसमां की हद छूते परिंदे' विषय पर रचना

मंच नमन 
बदलाव मंच (राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय मंच ) 
दिनांक - 21-10-2020
विधा - कविता
विषय -आसमां की हद छूते परिंदे 

आसमां की हद को छूते परिंदे l
नील गगन में उड़ते परिंदे l

न होती कोई जिम्मेदारी का बोझ, स्वच्छंद मन उड़ते l
दूर दूर तक खुले आसमान में उड़ते परिंदे ll

मनुष्य रुपी बंधन से मुक्त स्वतंत्र विचरण करते l
न दुनिया से कोई शिकवे शिकायत करते ll

अपनी ही दुनिया में बस रहते..... मस्त रहते l
चमन में हर तरफ प्यार ही प्यार फैलाते ll

हिंसा, अत्याचार, शोषण को मिटाते l
प्यार की गंगा बहाते ll 

विश्वा में सुख शांति और अमन का संदेश फैलाते l
एकता, भाई चारा, मित्रता का पैगाम देते ll

कितना अच्छा ये नजारा लगता l
देखकर ही मन है आनन्दित हो जाता ll 

काश हम भी इस धरा पर परिंदों के जैसा ही काम करते l
आसमां की हद को छूते परिंदे से सीख लेते ll


सविता मिश्रा 
(शिक्षिका, समाजसेविका और लेखिका ) 
वाराणसी उत्तर प्रदेश 
स्वरचित और मौलिक रचना

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