शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2020

बापू की व्यथा कथा#डॉ प्रकाश मेहता, बेंगलुरु#

*गांधी जयन्ती विशेष, बापू की व्यथा कथा...*
मैंने पूछा बापू आप तो दिन- रात नोटों पर छपे रहते हो, 
सरकारी अधिकारियो व राजनेताओं के कारनामे देखते रहते हो,
 फिर भी भ्रष्ट सरकारी अफसरों को कुछ नही कहते हो,
सत्य, अहिंसा का उपदेश उन्हें क्यो नही देते हो ??

बापू बोले कब कहूँ ? किसे कहूँ ? 
साल में एक दिन मेरे बोलने का अवसर आता  है,
 उसी दिन "गांधी जयंती" का अवकाश हो जाता है।
जहां जाता हूँ सारे के सारे दफ्तर बन्द पाता हूँ।
कर्मचारी को ईमानदारी की बात कह न पाता हूँ,
स्कूल में छुट्टी नही होती बच्चों के पास जाता हूँ,
उनको ही सत्य,अहिंसा का उपदेश देकर आता हूँ।
(# इस बार तो स्कूल भी बंद हैं )

*छोटा था कद मग़र,  नाम ख़ूब विशाल कर गया ।*
*जय जवान जय किसान देश को निहाल कर गया*
*सादगी का बिंब वो ठाठ बाट पे सवाल कर  गया।*
*गुदड़ी का था लाल वो, काम बेमिसाल कर गया।*

*राष्ट्र पिता गांधी व शास्त्री जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं..!!!*
डॉ प्रकाश मेहता, बेंगलुरु*

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