सोमवार, 19 अक्तूबर 2020

कवि सतीश लखोटिया जी द्वारा रचना “माँ ब्रह्मचारिणी"

*माँ ब्रह्मचारिणी*
 
 *ब्र*  ब्रह्मांड की स्वामिनी

 *म्हा*  मन हमारा बहुत अधीर
   हर्षित आपके आगमन पर

*चा* चाह हमारी गाएं भक्ति गीत

   *रि*  रिश्ता आपसे बहुत अनोखा

   *णी( नी)*   नंदिनी पधारो देने ज्ञान
            कलयुगी मानवों को 
             न बोये 
         दिलों में नफरतों के बीज

      सतीश लाखोटिया
       नागपुर, महाराष्ट्र

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