शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2020

कवि नारायण साहू जी द्वारा 'इस बात को रखो जी ध्यान' विषय पर रचना

बदलाव मंच अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय 

शीर्षक-
"इस बात को रखो जी ध्यान।"


बातें बात में बात बढ़े,
पानी से बढ़े धान।
वात्सल्य, स्नेह  से संतान बढ़े ,
अभाव में बढ़े गुणवान।
इस बात को रखो जी ध्यान।।

देखा-देखी में  खर्च बढ़े,
मेहनत से बढ़े किसान।
सुखे-सुख में परिवार बढ़े,
दुःख में बढ़े सियान।
इस बात को रखो जी ध्यान।।

रातों-रात बेईमान बढ़े,
धीर से बढ़े ईमान।
त्याग से विद्यार्थी बढ़े,
ध्यान से बढ़े विद्वान।
इस बात को रखो जी ध्यान।।

सत कर्म से सम्मान बढ़े,
दुष्कर्म से बढ़े अपमान।।
सहयोग से  मान बढ़े ,
अपराध से बढ़े शैतान।
इस बात को रखो जी ध्यान।।

जीत-जीत में अभिमान बढ़े,
हार में बढ़े पहचान।
शिक्षा से ज्ञान बढ़े,
परीक्षा से बढ़े इंसान।
इस बात को रखो जी ध्यान।।

लोभ से लालच बढ़े,
क्रोध से बढ़े अज्ञान। 
राग-द्वेष से दुश्मनी बढ़े,
प्रेम से प्रेम बढ़े कह गये संत सुजान।
इस बात को रखो जी ध्यान।।

नारायण प्रसाद 
आगेसरा(अरकार)
जिला-दुर्ग छत्तीसगढ़
दिनांक-22/10/2020
(मौलिक एवं स्वरचित रचना)

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