शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2020

श्याम कुँवर भारती (राजभर) जी द्वारा बेहतरीन रचना#

भोजपुरी गजल - जिनगी अब जहर भइल | 
तोहसे प्यार भइल घाव अब कहर भइल |
खा के धोखा आशिक एहर ना ओहर भइल| 
रूप के चाँदनी मे प्यार के आसरा खोजली |
रूप मिलल ना चान इश्क बे डहर भइल |
मासूम चेहरा मे दिल पत्थर कइसे होला |
बेवफा के दगा जिनगी अब जहर भइल |
प्यार कइल केवन कसूर बा बतावा केहु | 
टुटल दिल हमार प्यार अब बे कदर भइल| 
दिल तोड़ही के रहे सपना देखवलू काहे |
ठुकरा दिहलु हमके तमासा शहर भइल |
कीमत आशिक पत्थर दिल ना जाने कबों |
ना जनलु जिनगी भारती कईसे गुजर भइल| 

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी 
बोकारो झारखंड

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