शनिवार, 10 अक्तूबर 2020

कवयित्री शशिलता पाण्डेय जक द्वारा रचना “तुम्हारा इंतजार और हसरतें बेशुमार”

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तुम्हारा इंतजार और हसरतें बेशुमार
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उजड़े चमन ने कहा बहारो से,
मुझे भी इंतजार अपने श्रृंगार की!
तेरा इंतजार और हसरते बेशुमार,
मौसम को भी इंतजार अब बहार की!
दिल मे प्यार नैनो में सपने हजार,
इंतजार पतझड़ को बसन्त के बयार की!
पलक- पावड़े बिछाए रैना बीती जाए,
जवाँ हसरतें अपने प्रियतम के प्यार की!
बाहों में बसंत की, बेला- गुलाब खिलखिलाए,
रंगीन नजारे झूमती बयारें अदाएं प्यार की!
चमन में कलियाँ खिले मुस्कुराए,
कब खत्म होंगी रातें इतंजार की ?
कोयलिया गीत मिलन के मधुर गाएँ,
मौसम को भी इंतजार अब बहार की !
ओढ़ धानी चुनर शोभित पुष्प अलंकार,
वो मधुर घड़ी कब आएगी प्यार की?
मंडराए मधुप उपवन में बार-बार,
करूँ मैं पुष्प रसपान बीते घड़ी इंतजार की!
पतझड़ ने कहा उन फिजाओं से,
दिल बेकरार इंतजार अब बसंती बहार की!
अमवा की डाली पर बोले पपीहा बेकरार,
मैं गाऊ कब तराना- पुराना बसंत बहार की?
प्रकृति लहलहाए होली के रंग बरसाए,
रंग जाए चुनरिया साजन के प्यार की!
हसरते बेशुमार सजाऊ सपने हजार,
लेकर अदाएं अनेक मौसमी बयार की!
उजड़े चमन ने कहा फिजाओं से,
मुझे इंतजार अपने साजन बहार की!
 निहारती सुनी-सुनी सी अँखियों से,
करती प्रकृति इंतजार सृजन के बहार की!
उपवन हर्षाये कब फूलों की कली मुस्कुराएं?
मौसम शर्माए रूप, छटा अनुपम श्रृंगार की!
 गाये गीत मिलन के पूर्वी बयार झूम के आएं!
 जैसे कहानी हो राधा-किशन के प्यार की!
 सांवरे श्याम मधुबन में मधुर मुरली बजाए ,
  कही बीते जाए ना घड़ियां मनुहार की!
 धुन बाँसुरी की सुन राधा दौड़ी चली आएं,
   जैसे बजाए धुन मोहन राधिका के प्यार की!
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स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
 कवयित्री :-शशिलता पाण्डेय

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