मंगलवार, 13 अक्तूबर 2020

कवि साहेबलाल सरल जी द्वारा रचना “एपीजे अब्दुल कलाम जी"

*एपीजे अब्दुल कलाम जी*

 एपीजे अब्दुल कलाम जी हमारे देश के गौरव ही नहीं अपितु महानायक रहे। उनके द्वारा देश के लिए जो योगदान किया गया, वह अमिट है। उन्हें समूचा देश कभी भुला नहीं सकता, क्योंकि उन्होंने दृढ़प्रतिज्ञ होकर अपने द्वारा बनाये गए रास्ते पर चक्र जो मुकाम हासिल किया वो किसी से छुपा नहीं है। उनकी देश के लिये निःस्वार्थ  देशभक्ति के लिये उन्हें जन्म जन्म तक याद किया जाएगा। ऐसी शख्सियत बार-बार पैदा नहीं होती है।  आज उनके बारे में लिखने का अवसर पाकर मन प्रसन्न हो रहा है, परंतु  उनके बारे में समग्रता के साथ लिख पाना इतना आसान भी नहीं है क्योंकि उन्होंने जो कर दिखाया, वह सब काम सामान्य लोगों के लिये सम्भव ही नहीं असंभव है।  उन्होंने अपनी क्षमताओं के बल पर  वो सब कुछ करके दिखाया जिसे उन्हें जमाना जन्म जन्म तक याद करेगा।  देश के उत्थान के लिए निर्माण के लिये उनका योगदान सर्वोपरि रहा है। मिसाइल मैन के नाम से जिन्हें  जाना जाता है। उनकी सादगी ने उन्हें मानव से महामानव बना दिया। उनकी संयमित वाणी तथा कर्मों की ताकत ने उनकी बातों में वो दमखम भर दिया जिसे पढ़कर, सुनकर दुनिया उनको आदर्श मानने लगती है। उन्होंने बताया कि लगातार चलते रहने पर आप अपनी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उन्हीं के बताए गए आदर्शों पर चलकर देश तरक्की के सोपान को प्राप्त कर सकता है।  उन्हें जमाना सदियों तक याद करेगा।  देश के सच्चे सिपाही तुम को मेरा शत-शत नमन है।  देश के राष्ट्रपति के  पद पर सुशोभित होकर उन्होंने राष्ट्र का मान बढ़ाया, गौरव बढ़ाया। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने निरन्तर कार्य किया। मरते दम तक उन्होंने देशसेवा के लिये खुद को समर्पित कर नए युग को देश के लिए जीने का नया मन्त्र दिया। मरणोपरांत जो संपदा छोड़कर गए। लोगों ने देखा, महसूस किया कि देश के सच्चे सिपाही ने उस लोक में जाकर इस लोक का कितना नुकसान किया। 

मुझे उनसे प्रत्यक्षतः मिलने का सौभाग्य मिला। 12 नवम्बर सन 2011 को दिल्ली में NCERT द्वारा आयोजित सेमिनार को उन्होंने सम्बोधित किया था। मैं भी उस सेमिनार का हिस्सा था। ये मेरा सौभाग्य था कि ऐसे महामानव के प्रत्यक्ष दर्शन हुए। 

बड़ी ही सादगी का वरण कर उच्च विचारों ने उन्हें साधारण से असाधारण बना दिया। लोभ लालच को त्यागकर देशभक्ति को सर्वोपरि मानने वाले देश के सच्चे सपूत को मेरा शत शत नमन है।

-साहेबलाल सरल बालाघाट म प्र

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