सोमवार, 26 अक्तूबर 2020

शशिलता पाण्डेय जी द्वारा#

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है?
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तेरी बन्दगी मेरी जिन्दगी खूबसूरत ,
     मेरी जिंदगी तो तेरे ही सहारे।
        तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है?
           मुझे तेरी दृष्टि और कृपा की जरूरत।
                तेरे रहम पे सारी दुनियाँ थमी है,
              तेरी ही मर्जी से पतझड़ और बहारें।
             नही  तेरे बिन कोई भी मुहूरत,
      ऊपर अम्बर और नीचे जमीं है।
    वन ,उपवन,सरिता सागर, पर्वत,
      ये सारे दिए है तुमने दुनिया को नेमत।
              तू ही तो देता अंधेरों में रोशनी है,
                 तेरा साथ है तो मुझें क्या कमी है?
              ये धरती अम्बर चाँद सितारें,
            नही दे सकता कोई इसकी कीमत।
          हर संकट में निशदिन हम तुम्हे ही पुकारे,
        अधरों पर नाम तेरा आँखों में नमी है।
     माता-पिता और तुम्ही ज्ञानदाता हमारे,
      तुम्ही आदि हो और तुम्ही हो अनन्त ।
        तेरा साथ है तो मुझें क्या कमी है?
     सर पर आसमान कदम रखने को जमीं है।
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स्वरचित और मौलिक
सर्वाधिकार सुरक्षित
कवयित्री :-शशिलता पाण्डेय

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