शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2020

कवयित्री गीता पाण्डेय जी द्वारा रचना ““लाल बहादुर शास्त्री""

।। लाल बहादुर शास्त्री।।

2 अक्टूबर  190 4 को जन्म लिए मुगलसराय ।
पिता शारदा प्रसाद वह माता राम दुलारी की गोद आय ।।

 बाल्यकाल में ही पिता का काल कवलित हुये असमय । 
 माता राम दुलारी ने अपने पिता के घर पालन किया अनय ।।

प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हुए ललिता के संग हुआ ब्याह ।
काशी विद्यापीठ से शास्त्री उपाधि ले जीवन किया  निर्वाह ।।

 सपने पूरा कर सादा जीवन उच्च विचार भेष लिया ।
नाना की मृत्यु के बाद इनके मौसा ने सुंदर परिवेश  दिया ।।

 नेहरू की मृत्यु के बाद 1964 में बने प्रधानमंत्री ।
देश को कठिन परिस्थितियों में संभालते खोले जंत्री ।।

मरो नहीं मारो का भी इन्होंने दिया था जोशीला नारा ।
सभी आंदोलन में सहभागिता किये 
 बंदे उस धारा ।।

 कद काठी में छोटे फिर भी कम संसाधनों से शत्रु को धूल चटाई ।
जय जवान जय किसान का नारा देकर एकता बनायीं ।।

18 महीने के कार्यकाल में इन्होंने अजब करतब दिखाये ।
 राष्ट्रप्रेम का भाव ले अनमोल वचनों से सबको मिलाये ।।

1966 में भारत रत्न से सम्मानित  हो डाक टिकट पर आये ।
जनता की गाढ़ी कमाई हित में नहीं जनतक की उपयोग में लाये ।।

 पाक को जब हराये तो अमेरिका ने गेहूं पर रोक लगाई  ।
किसानों के उद्यम को ध्यान में ले आधुनिक तकनीक अपनाई ।।

दशहरे जैसा शुभ दिन लाकर किसानों का परचम लहराया ।
देश के सैनिकों को सम्मान देकर उनका मान बढ़ाया ।।

 परिवहन मंत्री बन महिला कंडक्टरों को भी नियुक्त किये ।
 गृह मंत्री बनने पर भ्रष्टाचार निवारण समिति भी दिये ।।

 महान स्वतंत्रता सेनानी प्रसिद्ध राजनेता अन्नदाता कहलाये ।
 ताशकंद समझौते में पाकिस्तान  में रहस्यमय अपनाये ।।

11 जनवरी 1966 को भारत माता का लाडला चिरनिद्रा में सोया ।
संघर्षों को झेलते हुए धैर्य से  जवाब देने वाला देश ने लाल खोया ।।

 मानवता के सच्चे कर्म योगी को आज सच्ची श्रद्धांजलि ।
गीता भी कोटिश: नमन में अर्पित करती है काव्यांजलि ।।

गीता पाण्डेय 
उपप्रधानाचार्या
रायबरेली उ०प्र०

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