सोमवार, 19 अक्तूबर 2020

कवि भास्कर सिंह माणिक कोंच जी द्वारा 'नारी शक्ति' विषय पर रचना

मंच को नमन
प्रतियोगिता हेतु रचना प्रेषित
 बदलाव अंतरराष्ट्रीय मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता
दिनांक- 19 अक्टूबर 2020
विषय-नारी शक्ति और नवरात्र विशेष पर विशेष आयोजन
विधा- कविता
शीर्षक -नारी शक्ति
भारत की नारी आदिकाल से
सदा रही मर्दानी ।
नारी की हुंकार को सुनकर
शत्रु की रूह थर्रानी।।

भारत की नारी आदिकाल से 
सदा रहे मर्दानी
दुश्मन के शीश उतारे रण में 
सदा रही वरदानी
हर काल में नर के संग संग
 नव पृष्ठ रचे नारी ने
अगर किसी ने आंख उठाई
बन गई काल भवानी
भारत की नारी आदिकाल से
सदा रही मर्दानी ।
दुश्मन के शीश उतारे रण में
सदा रही वरदानी।।


मेहनत से रिश्ता सदा रखा
कभी न पीठ दिखाई
रूखी सूखी खा कर के
घर की लाज बचाई
वो आन बान शान की खातिर
लिखती नई कहानी
सावित्री जैसी दृढ़ नारी से
यम ने हारी मानी
भारत की नारी आदिकाल से
सदा रही मर्दानी ।
दुश्मन के शीश उतारे रण में
सदा रही वरदानी।।

कभी किसी का बुरा न सोचे
सबकी करे भलाई
नटवर की दीवानी बनकर
प्रेम की ज्योति जलाई
अंग्रेजों ने पानी मांगा
झांसी की नारी से
पदमा दुर्गा सारंधा की 
अनुपम शौर्य जवानी
भारत की नारी आदिकाल से
सदा रही मर्दानी ।
दुश्मन की फीस उतारे रण में
सदा रही वरदानी।।

जेठ की कड़ी दोपहरी भी
नारी से घबराए
सावन में मेघों के संग
मस्ती में नाचे गाए
इतिहास बदल देती नारी
सदा रही बलिदानी
युग बदले हैं नारी ने
नारी ने जब-जब ठानी
भारत की नारी आदिकाल से
सदा रही मर्दानी ।
दुश्मन के शीश उतारे रण में
सदा रही वरदानी।।

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मैं घोषणा करता हूं कि यह रचना मौलिक स्वरचित है।
      भास्कर सिंह माणिक, कोंच
              ( कवि एवं समीक्षक)

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