शनिवार, 10 अक्तूबर 2020

कवि निर्मल जैन ‘नीर' जी द्वारा रचना “बेटियाँ"

बेटियाँ.....
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कुल की लाज~
बेटियाँ सदा होती 
सिर की ताज
बदलो सोच~
बेटियाँ नही होती
घर की बोझ
हमको नाज~
बेटियाँ दिलों पर
करती राज
बेटी निष्पाप~
भ्रूण की हत्या कर
न करो पाप
करो सम्मान~
बेटियों को भी मिले
खुला वितान
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     निर्मल जैन 'नीर'

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