शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2020

डॉ. प्रकाश मेहता जी द्वारा विषय जीवन में सुख दुख पर बेहतरीन रचना#

जीवन में सुख-दुख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं..!
(डॉ प्रकाश मेहता, बेंगलुरु)*

इस संसार की बनावट ही ऐसी है कि यहाँ
सुख के साथ दुःख भी अवश्य आते हैं।
सुख- दुःख जिवन रूपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं,
अतः सुख में अतिउत्साहित होना व दुःख में घबराकर मायूस होने की आवश्यकता नहीं है।

विपरीत परिस्थितियों  का आना
जीवन का स्वाभाविक गुण है,
इनमें जो अच्छी परिस्थितियों का चिन्तन करते रहते हैं वे बुद्धिमान कहे जाते हैं।
उनके सामने कठिनाइयाँ आती है
तो सकारात्मक सोच के द्वारा चुटकी बजाते ही हल कर ली जाती है।
जीवन की हर समस्या के भीतर
एक उपहार छुपा होता है
इसलिए जो समस्या आये तो,निराश मत होइए
उसका अंत आपकी उम्मीदों से
सुंदर हो सकता है।
परन्तु जो भूत- भविष्य के भय से
काँपते रहते हैं उनके लिए सुख
भी एक धोखा ही सिद्ध होता है।
अतः हम शुभ सोंचे और शुभ कर्म करे।
वर्तमान में जिए व सुखद भविष्य की आशा रखें।
यह कहीं अधिक उत्तम व समयोचित है।
इससे कठिनाइयों का
आधा हल तत्काल हो जाता है।

 कौन क्या कर रहा है, कैसे कर रहा है, क्यों कर रहा है – इससे हम जितना दूर रहेंगे,अपनी मंजिल के उतने ही करीब रहेंगे।
जहाँ दुसरो को समझना
         कठिन हो जाए
 *वहा खुद को समझा लेना ही*
      *बेहतर होता है।*
*मंजिलें हर किसी के नसीब में नहीं होतीं;*
*तकदीर हर किसी पर मेहरबान नहीं होती!*
*सफर जिंदगी का बहुत ही हसीन है;*
*सभी को किसी न किसी की तलाश है!*
*किसी के पास मंजिल है तो राह नहीं;*
*किसी के पास राह है तो मंजिल नहीं।*

*विज्ञान के इस युग में ...*
*चाँद पर पहुँचना सरल हो गया है* 
*लेकिन खुद के भीतर झांकना,*
*आज भी उतना ही दूश्कर हो गया है।*
*यही दुःख का मूल कारण है।*
*अगर जिंदगी को खुशीयों का गुलदस्ता बनाना है तो "सरल रहिये", ताकि सब आप से हिलमिल सके, "तरल रहिये", ताकि आप सबमें घुल-मिल सकें ..!*

*अंत में कहता है "प्रकाश"...*
*जिन्दगी एक रात है, जिस में ना जाने कितने ख्वाब हैं,*
*जो मिल गया वो अपना है,*
*जो टूट गया वो सपना है,*
*जीवन में उन सपनों का..*
         *कोई महत्व नहीं,*
*जिनको पूरा करने के लिए....*
*अपनों से ही छल करना पड़े।*
*ये मत सोचो की जिन्दगी में कितने पल है,*
*ये सोचो की हर पल में कितनी जिन्दगी है।*
*इसलिए… जिन्दगी को जी भर कर जिएं !…*
*मंजिल मिलेगी राहों में चलने से,*
*क्यूँ राह गुज़र की बात करें .!*
*आगाज़-ए-सफ़र से पहले क्यूँ*
*अंजाम-ए-सफ़र की बात करें..!!*इन्हीं विचारों के साथ...*
मेरी कलम से 

*डॉ. प्रकाश मेहता*

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