बुधवार, 21 अक्तूबर 2020

एकता कुमारी, बिहार जी द्वारा विषय नारी शक्ति पर खूबसूरत रचना#

बदलाव मंच राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय मंच को नमन 
सप्ताहिक प्रतियोगिता विषय - *नवरात्रा और नारी शक्ति*
दिनांक - 21-10-2020
शीर्षक - *"नारी ही शक्ति "*
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शीशे का मन मेरा कभी देख ना पाए,
फिर तुमने दर्पण को देखा तो देखा ही क्या??
मेरे रूह को कभी तुम छू ना पाए,
जिस्म को मेरे छू लिया तो छुआ ही क्या??
विश्वास का अर्पण तुम कर ना पाए,
फिर धन दान दिए तो दिए ही क्या??
प्रेम का दीपक तुम जला ना पाए ,
तो फिर कुलदीपक ही बने तो बने ही क्या??
नारी मन को कभी तुम जीत ना पाए,
तो सारे जहाँ को जीते तो जीते  ही क्या??
यदि तुम नर हो तो मैं भी  हूँ नारी,
नहीं हूँ मैं अबला नहीं बेचारी।
रिश्ते -गृहस्थी ही है मेरा जीवन,
नहीं है कोई मेरी मजबूरी 
तेरे भी जीवन की मैं ही हूँ धूरी।
मुझसे पूर्ण सम्मान कभी तुम ले ना पाए 
तो फिर जग सम्मानित भी हुए तो हुए ही क्या?? 
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एकता कुमारी, बिहार।

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