शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2020

कवि भास्कर सिंह माणिक कोंच जी द्वारा रचित मुक्तक

मंच को नमन

 (समीक्षार्थ प्रस्तुत)

       मुक्तक गीत
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देख प्रकृति का अनुपम श्रृंगार
ह्रदय  मचले  करने  अभिसार
लता   वृक्ष   से  लिपट  लिपट
करती    है    आलिंगन   प्यार

करते  क्रीड़ा  हंस  सरोवर  में
फूलों  की  गंध  उड़े  अंबर में
वृक्ष  हमारे  हैं  जीवन आधार
देते   हैं  हम   सबको  आहार

रंग-बिरंगे  पुष्प  लगे  मनोहर
मन  की  पीड़ा  को   लेते हर
करते  आनंदित  बनकर  हार
भेद   रहित करते  हैं  सत्कार

जल ही जीवन जीवन जल
करे  झील तन  मन शीतल
करते  संरक्षण की मनुहार
माणिक इनकी सुनो पुकार

बाढ़  तूफान से  करें  सुरक्षा
शुद्ध   वायु   दे  करते   रक्षा
निस्वार्थ भाव करते उपकार
सबसे  एक  समान व्यवहार

नहीं किसी का करते तृष्कार
करते  सब   को    अंगीकार
राजा  रंक  किंचित भेद नहीं
प्रकृति  करती  सबसे  दुलार
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मैं घोषणा करता हूंँ कि यह रचना मौलिक स्वरचित है।
            भास्कर सिंह माणिक, कोंच

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