रविवार, 4 अक्तूबर 2020

कवि व लेखक भास्कर सिंह माणिक कोंच जी द्वारा 'गांधी जी,अहिंसा और प्रेम' विषय पर रचना

बदलाव अंतरराष्ट्रीय मंच को नमन
प्रतियोगिता हेतु प्रेषित
विषय- गांधीजी, अहिंसा और प्रेम
                अथवा 
       जय जवान, जय किसान

जहां  प्रेम है,  वहीं है अहिंसा
जहां पर द्वेष है, वही है हिंसा
मेरी दृष्टि में "गांधीजी ,अहिंसा और प्रेम"अहिंसा हमेशा सद्भाव सुपथ, प्रगति ,उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है लेकिन अहिंसा का अर्थ यह नहीं जो गांधी जी ने कहा है, कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे आप दूसरा गाल कर दीजिए। मैं इस कथन का विरोध तो नहीं करता लेकिन मैं इस कथन को पूर्ण रूप से सत्य भी नहीं मानता क्योंकि समय परिवर्तनशील है प्रकृति का शाश्वत सत्य यही है समय-समय पर परिवर्तन होते हैं होते रहे हैं। यदि अहिंसा और प्रेम से ही सारा संसार चले तो हमारी धरा पर कुकृत्य दुर्भाव जैसे विचार ही समाप्त हो जाएंगे और ए सुसंस्कारित समाज कहलायेगा। सुसंस्कारित समाज मेरी दृष्टि में देव तुल्य माना जाता है। यदि हम गांधी जी की अहिंसा और प्रेम वाली नीति को पूर्व से सत्य माने तो हमारे देश में क्रांतिकारी वीरों की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। क्रांतिकारी वीर योद्धाओं के भय से ही हमारा देश आजाद हुआ। सत्य, अहिंसा और प्रेम की परिभाषा को उस समय भी और आज भी कुछ समाज के रहनुमा कायरता का प्रतीक मानते हैं। गांधी जी ने सत्य, अहिंसा और प्रेम की बात कही है ,वही "करो और मरो "की भी बात कही है।
आज हम आप पूरा भारत स्वतंत्रता की चर्चा करते, आजादी में सांस ले रहे हैं। यह करो या मरो की ही ताकत थी कि हमारे देश को छोड़ने के लिए अंग्रेजों को विवश होना पड़ा। शांति आंदोलन आदि आदि आंदोलन होते रहे हमारे अनगिनत भारती सपूत बलिवेदी पर आहुति देते रहे लेकिन अंग्रेज नहीं झुके। जब करो या मरो की बात अंग्रेजों ने सुनी उसी समय अंग्रेजी शासन के हौसले डिगने लगे। अंत में देश छोड़ने पर विवश होना पड़ा । यदि अहिंसा और प्रेम ही सर्वज्ञ था तो करो मरो की क्या आवश्यकता थी।
गांधी जी ने देश की आजादी के लिए शांति का मार्ग अपनाया। गांधी जी ने अहिंसा और प्रेम का महत्व समझाया। अहिंसा और प्रेम समाज संगठित रखता है। मैं गांधीजी को नमन करता हूं। लेकिन दुख इस बात का है कि देश का बंटवारा यदि सही ढंग से किया होता तो आज हमारे देश में आतंकवाद , नक्सलवाद, माओवाद आदि कभी नहीं पनपता। मुंह त्याग की बात करना सरल है परंतु वह छोड़ना पड़ा कठिन।
मैं अधिक तो कुछ नहीं कह सकता नाथूराम गोडसे ने गांधी जी को गोली क्यों मारी। ऐसा क्या कारण था जो व्यक्ति अहिंसा और प्रेम का अनुयाई था। गांधीजी के पद चिन्हों पर चलने वाला, गांधी जी से अपने प्राणों से भी ज्यादा प्रेम करने वाला ,गांधीजी से अधिक अहिंसा का पालन करने वाला, गांधी जी को गोली मार देता है। ऐसा क्या कारण था या गांधीजी के अहिंसा और प्रेम में क्या कमी थी जिसके कारण नाथूराम गोडसे को गांधी जी को मारने पर विवश होना पड़ा। यह बहुत गहन चिंतन का विषय है।
मैं इतना ही कहूंगा। देश की सुरक्षा के लिए अहिंसा और प्रेम ही सर्वज्ञ नहीं है। देश की सुरक्षा के लिए साम दाम दंड भेद आदि नीतियों पर चलना ही पड़ेगा।
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मैं घोषणा करता हूं कि यह लेख मौलिक स्वरचित है।  
भास्कर सिंह माणिक, कोंच              (ओज कवि एवं समीक्षक)

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