शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2020

इन आँखों ने देखे है मौत के चेहरे#शशिलता पाण्डेय जी#

इन आखों ने देखे है मौत के,,,,,
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मेरी इन गहरी आँखों ने,
गम देखें है जमानें भर के।
 खुशियों से खिलखिलाती जिन्दगी,
 अपनों कें दिल चीरनेवाले मौत के मंजर।
कभी जिन्दगी नें दामन में,
 जगमग चमकते सितारें दिए भर । 
   कभी चुभाए मेरे सीने में ,
  दुखद अहसासों के तीखे खंजर।
रख्खा है हमनें आँखों के समंदर में ,
 जानें-अन्जाने राज गहरे छुपाकर।
 कभी गमगीन जिन्दगी के अहसास,
 कभी रंगीन जगमगाते सपनें सजाकर।
जिन्दगी ने दिए जख्म तमाम राहों में,
 फिर भी चलते रहें पगडंडियों पर।
राह में रुकना मेरी फितरत नहीं,
 पाँव घायल हो चाहे काँटो से उलझकर।
होतें है जिन्दगी के सफर में काँटे भी,
मिलतें है फूल भी काँटो से गुजर कर ।
  मिलती नही, मुक्कमल जिन्दगी कभी,
आसान राहें और खुशियाँ थाल में सजाकर।
आँखें रखती उन अहसासों को ,
बीच में अपनी पलकों के छुपाकर।
 आँखों में अहसास है जमानें भर का,
 अहसासे ख़ुशी है आँखों में अगर।
लंबी ज़िन्दगी की राहों के दरमियाँ,
 आँखे जो मौत भी देख सकती है।
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स्वरचित और मौलिक
      सर्वाधिकार सुरक्षित
    ,कवयित्री-शशिलता पाण्डेय
   

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