रविवार, 6 सितंबर 2020

एकता कुमारी, बिहार की गद्य रचना

अंतरराष्ट्रीय बदलाव मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता 
शीर्षक - 
"लॉक डाउन में शिक्षकों की स्थिति"
विधा - गद्य 
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शिक्षक किसी भी राष्ट्र का राष्ट्र निर्माता और भाग्य विधाता होता है।शिक्षक को हम इंसान तो क्या भगवान भी उनकी पूजा व आशीर्वाद के लिए लालायित रहते हैं। इसलिए तो गुरु का दर्जा ईश्वर से भी बड़ा माना गया है।
       गुरु, "गुरुत्व शक्ति" हैं।गुरु के मार्गदर्शन के बिना कोई कार्य सम्भव नहीं है। सेना, चिकित्सक, अभियंता, नेता, अभिनेता, कोई प्रशासनिक अधिकारी शिक्षक के मार्गदर्शन से ही बनते हैं। इनमें से सभी अपने अपने क्षेत्र में कुशल होते हैं। अपने ज्ञान का दान कर शि्क्षक सभी के महान व्यक्तित्व का निर्माण करता है। माता - पिता अगर बच्चों को अच्छे संस्कार और परवरिश देते हैं तो वहीं, शिक्षक बच्चों को सुयोग्य, कर्मठ, ईमानदार, निष्ठावान बनाने का कार्य करते हैं। अपने ज्ञान के साँचे में ढाल कर बच्चों को खूबसूरत व्यक्तित्व प्रदान करते हैं जिससे वो देश की सेवा, जन- जन की सेवा पूरे ईमानदारी पूर्वक कर सकें।
               लेकिन, आज हमारे देश का  दुर्भाग्य है कि शिक्षक ही उत्पीड़न के शिकार हो रहे हैं। उनके साथ उपेक्षित व्यावहार किया जा रहा है। कभी सरकार के द्वारा, तो कभी समाज और कभी तो छात्र भी उनके साथ बदतमीजी से पेश आने में नहीं चूकते।मूल रूप से कहा जाए तो शिक्षक आज हर जगह हर तरीके से उपेक्षित हो रहा है। उन्हें वो सम्मान नहीं दिया जा रहा है जिसका कि वो हकदार हैं।
                 आज राष्ट्र निर्माता ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं। खास कर प्राइवेट संस्थान के शिक्षक। आज सरकारी हो या प्राइवेट सभी संस्थाओं के शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार और अधिकारी आराम से निश्चिंत होकर सोये हुए हैं। उन्हें तो यह भी मालूम नहीं है कि हमारे देश का शिक्षक किस परिस्थिति का सामना कर रहा है  ?और अगर जानकारी है ,तो वो कोई नजर अंदाज कर इस पर कोई पहल नहीं करना चाहते। शिक्षकों को समय पर न ही वेतन मिलता है और न ही और कोई सुविधा। 
                इस कोरोना महामारी काल में तो शिक्षकों की स्थिति और भी नाजुक हो गई है। उनके आगे भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। उनकी पारिवारिक स्थिति दयनीय हो गई है। क्योंकि, न ही सरकार वेतन दे रही है और न ही प्राइवेट संस्थाओं के अधिकारी। ऐसे में प्राइवेट शिक्षक के आगे सिर्फ अंधेरा ही अँधेरा है ।सूरज के उजाले में भी। उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा है कि वो करें तो क्या करें?जबकि, प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र किसी बहुत बड़े अधिकारी, बिजनेसमैन, पूंजीपति के बच्चे होते हैं। इसके बावजूद भी शिक्षकों के हालात पर किसी का ध्यान नहीं जाता। 
              वर्तमान समय में हालात ये है कि अपने ज्ञान से सारे जग को रौशन करने वाले ये शिक्षक ही अर्थ के अभाव में दर दर भटकने के लिए मजबूर हैं।समय रहते अगर इन पर सरकारी, अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया गया तो कहीं  पर ये कोई भयावह रूप  ले सकतें हैं शासन और प्रशासन को शिक्षकों की दिशा में आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए ठोस कदम उठाते हुए जल्द से जल्द कोई पहल करने की जरूरत है।
         * * एकता कुमारी, भागलपुर, बिहार ।**

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