गुरुवार, 17 सितंबर 2020

कवयित्री - आ.नीलम डिमरी जी द्वारा सुंदर रचना

नमन वीणा वादिनी
दिनांक--17/09/2020
विषय --दिल सुधर जा
विधा --गीत

दिल सुधर जा मेरे,
कोई नहीं पास तेरे,
बेटी गई ससुराल अब,
बेटी भी पराए हो चले,
दिल सुधर जा मेरे।

कैसे संभालूं इस दिल को,
जो हर बात पर तुम्हें याद करता है,
तुम तो मस्त अपनी दुनिया में,
तुम्हारी मां का दिल हर बात पर रोता है,
दिल सुधर जा मेरे।

बुढ़ी हो चली आंखें मेरी,
तुम्हारा रास्ता निहारते- निहारते,
दहशत बैठ गई है मन में,
बस तुम मेरे सपनों में आते,
दिल सुधर जा मेरे।

बेबस हैं ये बूढ़ी आंखें,
चले गए जो अपनों से दूर,
कैसे समझाऊं इस दिल को,
वह तो अब मुझे गए हैं भूल,
दिल सुधर जा मेरे।

सपने बुनती रहती वह मां,
विश्वास उसका नहीं तोड़ना,
आशा ,उम्मीद उसकी हंसी,
पर उससे कभी मुंह ना मोड़ना,
दिल सुधर जा मेरे।
कोई नहीं पास तेरे।


     रचनाकार--- नीलम डिमरी
      चमोली----- उत्तराखंड

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