शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

हे भगवान# रचनाकार रूपक जी द्वारा श्रेष्ठ रचना#

हे भगवान......

इस धरती पर सभी इंसान तो तुम्हारा ही संतान है
सभी के तुम ही तो माता - पिता और पालनहार हो।

क्या तुम अपने सभी बच्चे से भी बहुत नाराज़ होते हो?
फिर तुम दिनभर की उपासना रखने, से ही मानते हो।

अपने बच्चे को उसके खुशी भरी जिंदगी देने के लिए
उस संतान से इसके लिए तुम बहुत, चढ़ावा मांगते हो।

अगर कोई भी संतान तुम्हारा पूजा पाठ नहीं करता है
तब उसे तुम बहुत ही कष्टप्रद सी जिंदगी जीने देते हो।

फिर जब वह भूखा पेट रहकर पूजा अर्चना करता है
तब तुम उसके कष्ट को दूर करके खुशी प्रदान करते हो।

किसी लाचार बेबस पर जुल्म और अत्याचार करता हो
उसके चढ़ावा और बलि देने से पल भर में खुश होकर
               उसको उसके सभी पापों से मुक्त कर देते हो

कोई अगर तुमसे नाराज़ होकर तुमसे सवाल करने लगे
तब उसे अपना संतान नहीं,उसे शैतान मानने लगते हो।

जब तुम इनसे नाराज़ होते हो तब इसे बहुत कष्ट देते हो
अपना काम छोड़कर भी भक्ति करने के लिए कहते हो।

जो तुम्हे ये सब नहीं करके सिर्फ मन में ही मानता हो
उसे तुम अपना भक्त नहीं, उसे दुश्मन मानने लगते हो।
©रूपक

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें