शुक्रवार, 25 सितंबर 2020

वक्त#निर्मल जैन 'नीर' जी द्वारा बेहतरीन रचना#

समय/वक्त...
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वक्त की मार~
इससे कोई बचा
नही है यार
बढ़ता चल~
वक्त के नये स्वप्न
गढ़ता चल
कोई न मोल~
यह समय बड़ा
ही अनमोल
रीत न जाये~
समय यों ही व्यर्थ
बीत न जाये
नही रहता~
वक्त मुट्ठी में रेत 
सा फिसलता
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निर्मल जैन 'नीर'
ऋषभदेव/उदयपुर

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