सोमवार, 21 सितंबर 2020

वो पहली मुलाकात#शशिलता पाण्डेय जी द्वारा बेहतरीन रचना#

❤️वो पहली मुलाकात❤️
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जब पाते हम,
 अपने ख्वाबों को।
हकीकत में,
 बदलते अहसास ।
जीवन एक,
 स्वप्न सा प्रतीत होता।
वो सुखद ,
अनुभूतियां लगती पास।
अपने सपनों से,
 वो पहली मुलाकात।
जानें कितनें नींद,
 गवायें भूख-प्यास?
जो मेहनत,त्याग,से,
 सुख होता प्राप्त
जो मिलते जीवन मे,
 बनकर कुछ खास।
सबसे यादगार होते,
 वो दिन और रात,
पाँव जमीं पर ,
कल्पना में ऊँचे आकाश।
सपनों को मिलते पंख,
 हौसलों की उड़ान उन्मुक्त।
जो जीवन में अलग से,
 देखते सपने खास।
जिनमें होती,
 महत्वकांक्षाओं सी कोई बात।
उनकी जिन्दगी जीवन मे,
 कभी नही उदास।
अपनें ख्वाबों को पूरे,
 करने को करते मेहनत।
उम्मीद का प्रज्वलित करके,
 दीप नही हो निराश।
जीवन मे पाते सम्मान,
 इज्जत और शोहरत।
हसीन रात सपनों से,
 हकीकत में हो मुलाकात।
वो जिन्दगी की सपनो से,
 पहली मुलाकात खास।
सबसे सुंदर लगती,
 उसदिन की वो हसीन रात।
जीवन की सबसे सुखद,
 अनुभूति सुन्दर अहसास।
कल्पनाओं की हकीकत से,
 वो पहली मुलाकात।
जब झिलमिलाते आँखों मे,
 सितारे दिखे पास,
जीवन सार्थक होता,
 और खुशियाँ देती हर बात।
जब खुशियाँ की मिले,
 मंजिल धरती और आकाश।
अँधेरी रातों में भी लगे,
 चाँद और तारों की बरात।
जब पराये भी लगने लगे,
 अपने दिल के पास,
यादगार ख्वाबों की हकीकत से,
 वो पहली मुलाकात ।
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स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
कवयित्री:-शशिलता पाण्डेय

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