मंगलवार, 29 सितंबर 2020

कवयित्री शशिलता पाण्डेय जी द्वारा रचना (विषय-गाँधी जी अहीसा और प्रेम)

नमन बदलाव मंच
राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय साप्ताहिक प्रतियोगता 2020
विषय:-गाँधीजी अहीसा और प्रेम
दिवस:मंगलवार
दिनांक:-29/09/2020
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गाँधीजी के अहिंसा और प्रेम
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 देशभक्तों की श्रेणी में सबसे प्रथम स्थान पर 
कहे जाने वाले अपने राष्ट्रपिता को कौन नही
जानता है। अपने स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास
 के पटल पर अपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की
 एक अलग छवि ही अंकित थी। जो सत्य,अहिंसा
 और प्रेम से परिपूर्ण थी।
गाँधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी
था।एक जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के
पोरबंदर में हुआ था।इनके पिता का नाम करमचंद
 गांधी और माता का नाम पुतली बाई था।
इनका पूरा जीवन प्रेम, अहिंसा और सत्य का 
संगम रहा था। गाँधीजी के विचारों के दर्शनानुसार
 अहिंसा के तीन लक्ष्य दिखाई देते है।
गांधीवादी विचारों के अनुसार अहिंसक व्यक्ति ही
 सत्य के दर्शन कर सकता है। सत्य और हिंसा में
 कभी मिलाप हो ही नही सकता क्योंकि सत्य
 हिंसा से कोशों दूर रहता है।
 कोई भी प्राणी मात्र बिना अहिंसा के
 प्राणी हित के बारे में सोच भी नही सकता है।
अहिंसा के बिना प्रेम की भावना विचारों में समाहित
हो ही नही सकती है।
गाँधीजी ने अपने विचारों और आदर्शो के बारे में
कहा था कि,सत्य और निष्ठा पर अडिग रहने के
लिए आपेक्षित शक्ति उन्हें अपनी नैतिक शुद्धता
तथा काम, क्रोध, आदि भयंकर शत्रुओं को अपने
से दूर रखने से मिली जिसकी वजह से दृष्टि और
निर्णय दूषित नही हो सके। अहिंसा और प्रेम को
अपना धर्म माननेवाले, सत्य और अहिंसा के प्रणेता
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के, उल्लेखनीय कार्यो की
और वचनों की चर्चा भी आवश्यक है।
उनके वचनानुसार:-अगर मैं नितांत अकेला भी होउ
तो सत्य और अहिंसा पर दृढ़ रहूंगा क्योकि यही सबसे
ऊँचा साहस है। जिसके सामने एटमबम भी अप्रभावी
बन जाता है।- महात्मा गांधी
हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधीजी एक प्रमुख
 राजनीतिक और आध्यात्मिक नेता रहे थे। और
 बहुत सारे  ऐतिहासिक कार्य किये थे। हिन्दू-मुस्लिम
एकता का प्रचार अछूतोद्धार, सर्वधर्म समन्वय-
गाँधीजी ने जो प्रमुख सत्याग्रह आंदोलन किये थे
उनमें प्रमुख सत्याग्रह :-बिहार को नील सत्याग्रह,
खेड़ा का किसान सत्याग्रह, दांडी यात्रा या नमक
सत्याग्रह, इत्यादि।
उन्होंने विदेशी माल का बहिष्कार कर स्वदेशी
अपनाने पर जोर दिया था। शराबबंदी के
लिए अनेक धरने प्रदर्शन किए तथा भारत वासियों
 को ललकारा 'करो या मरो"।
अंगेजो को चेतावनी दिया "अंग्रेजो भारत छोड़ो"।
स्वदेशी वस्त्रों के प्रचार के लिए नवजीवन या यंग
-इंडिया जैसे चरखे और खड़ी को महत्व।
गाँधीजी ने नेशनल इंडियन कांग्रेस की भी स्थापना की।
उन्होंने देश की आजादी के लिए अनेको बार जेल
गए बल्कि ये कहना उचित होगा कि जिंदगी का
आधा समय उन्होंने जेल में बिताया। अनेक
यातनाएं भी सही। अंततः देश आजाद भी हुआ।
15 अगस्त 1947को देश आजाद हो गया था।
गाँधीजी रोज नई दिल्ली के बिड़ला भवन में
सुबह शाम प्रार्थना सभा मे जाते थे। 
30 जनवरी 1948 को सायंकालीन सभा मे अपने
अनुचरों के साथ प्रार्थना करने जा रहे थे। उनके
पैर छूने के क्रम में धोखे से नाथूराम गोडसे नामक
व्यक्ति ने उनके सीने में गोली मार दी और वे हे राम!
कहते हुए भूमि पर गिर पड़े और अमर गति को
प्राप्त हो गए। नाथूराम एक कट्टर हिंदूवादी नेता
था जो हिन्दू-मुस्लिम संबंधी बटवारे से असंतुष्ट था।
आज बापू के आदर्शो पर चलने का संकल्प लेते
हुए उनकी जयंती 2 अक्टूबर को मनाते है।
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जयहिंद
स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
लेखिका:-शशिलता पाण्डेय
बलिया उत्तर प्रदेश

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