शनिवार, 19 सितंबर 2020

कवि-रमेश चंद्र भाट जी द्वारा रचना (विषय:वर्णमाला - व्यंजन)

दिनांक--18-09-2020

शीर्षक- वर्णमाला - व्यंजन
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स्वरचित रचना
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क = कर्मफल का  करो  विचार, 
ख = खत्म करो सब बैर विचार।
ग = गया वक्त  लौट  नहीं आता,
घ = घड़ी पल में बितता  जाता।
ङ = अङ्गिकार  कर   सदाचार।

च = चलो  सत्य   के  पथ  पर,
छ = छोड़ो सब  मिथ्या विचार।
ज = जपलो  हरपल   प्रभु  को,
झ = झंझावतों  से  देगा उबार।
ञ = संञ्चित होंगे शुद्ध विचार।

ट = टकराये जो  अहम विचार,
ठ = ठहर जाएंगे जीवन बहाव।
ड = डटकर  करो  सामना  तो,
ढ = ढह जाएंगे दुख के पहाड़।
ण = प्रण ही बाधाएँ देगा तोड़।

त = तैयारी यदि जीत की करनी,
थ = थकने का नहीं करो विचार।
द = दर्पण सा जीवन  बन  जाए,
ध = धर्म का यदि करो व्यवहार।
न = न्याय की थामें रहो पतवार।

प = परोपकार करो तुम जग में,
फ = फल की इच्छा मत करना।
ब = बनकर प्रभु  के  सच्चे बंदे,
भ = भक्ति भाव दिल में रखना।
म = मानव हो  मानवता रखना।

य = यही समय है सही राह पर,
र = राही  कदम  बढा़ते  जाना।
ल = लड़खड़ाए ना कदम  कहीं,
व = वचन वक्त पर हमे निभाना।

श = शशि समान  शुभ्र बनकर,
ष = षड्यंत्रों  से   नाता  तोड़ो।
स = सत्य  के अनुगामी बनकर,
ह = हर खुशियों से नाता जोड़ो।

क्ष = क्षमा मिटाता  वैर  है  सारे,
त्र = त्रिविध ताप से प्रभु बचाते।
ज्ञ = ज्ञान मिटाता  है दुख  सारे,
ऋ = ऋषि मुनी यह बात बताते।

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नाम-रमेश चंद्र भाट
पता-टाईप-4/61-सी,
रावतभाटा, चितौड़गढ़,
राजस्थान।
मो.9413356728

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