गुरुवार, 24 सितंबर 2020

लेखिका:-शशिलता पाण्डेय जी द्वारा बिषय चुराए हुए पल पर बेहतरीन रचना#

   🌹चुराए हुए पल🌹
******************
जब संसार मे मैं आई थी,
ये जीवन बड़ा अलबेला था।
मस्त हवा के झोंके सा बचपन,
गुड़ियों के संग खेला था ।
'खेलकूद कर बड़ी हुई जब,
जीवन मे बड़ा झमेला था ।
अपनों  की खुशियों के खातिर,
बहुत अँधेरा झेला था ।
बस एक ज्ञान की ज्योति  जलाई,
ह्रदय में हुआ उजाला था।
अपने लिये चुराया कुछ पल,
शौक पढ़ने का पाला था।
अपने लिए'' अब भी कुछ पल,
रोज 'चुराया करती हूँ।
दौड़-भागकर थक जाती जब,
फिर मैं पुस्तक पढ़ती हूँ।
अपना बाकी कुछ पल चुराकर,
काव्य, कहानी लिखती हूँ।
अपनो के लिए बहुत जी लिया,
'अपने लिए' भी जीती हूँ।
इसके लिए रोज-रोज मैं,
माँ भारती का वंदन करती हूँ।
********************
  स्वरचित और मौलिक
    सर्वाधिकार सुरक्षित
    लेखिका:-शशिलता पाण्डेय

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें