रविवार, 27 सितंबर 2020

कवि अख्तर अली शाह "अनन्त" जी द्वारा 'बेटी' विषय पर रचना

कविता
बेटियां तो इस धरा की शान हैं .
ंंंंंंंंंंंं
ये नहीं अपमान ये अभिमान हैं ।
बेटियां तो इस धरा की शान है   ।।
ंंंंंंंं
कोख में मत बेटियों को मारिये ।
भ्रूण हत्या पाप है स्वीकारिये ।।
आपके घर बेटियां मेहमान हैं ।
बेटियां तो इस धरा की शान हैं  ।।
ंंंंंंंं
बेटियों में माँ छिपी पहचान लो ।
बेटियों में है बहन संज्ञान लो  ।।
बन के पत्नी ये पति का मान है  ।
बेटियां तो इस धरा की शान हैं  ।।
ंंंंंंंं
बेटियों का मन गगन है दोस्तों।
बेटियों में अपना पन है दोस्तों।।
ये जमीं पर ईश का वरदान है।
बेटियां तो इस धरा की शान है  ।।
ंंंंंंंंंं
स्वर्ग की कुंजी से क्यों अनजान तू।
बेटियां यश की पताका मान तू।।
बेटियां जिनके हैं वे धनवान है  ।
बेटिया तो इस धरा की शान हैं  ।।
ंंंंंंंं
बेटियों से जिंदगी है जिंदगी ।
बेटियों को पालना है बंदगी ।।
बेटियां गम में मधुर मुस्कान है।
बेटियां तो इस धरा की शान हैं  ।।
ंंंंंंंंंं
बेटी बेटों में करो मत भेद तुम ।
बेटियों को कर रहे क्यों कैद तुम।।
क्या "अनन्त"आप भी अनजान हैं।
बेटियां तो इस धरा की  शान हैं।।
ंंंंंंंं
अख्तर अली शाह "अनन्त"नीमच

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