शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

शिक्षक राष्ट्र के निर्माता# डॉ०विजय लक्ष्मीकाठगोदाम, उत्तराखण्ड जी के द्वारा बेहतरीन गध्य लेख#

बदलाव मंच को नमन
अन्तर्राष्ट्रीय साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु गद्य रचना 
विषय- "शिक्षक राष्ट्र के निर्माता"

गुण-दोष की परख बताये,
वह हमें सही राह दिखाये,
प्रेम से त्रुटि का करे सुधार,
सफलता की ओर ले जाये।

शिक्षक हमारे राष्ट्र के निर्माता हैं। शिक्षक ही छात्र को गुण-दोष की परख बताता है, उसके भविष्य के लिए क्या सही है और क्या गलत है ये सब एक शिक्षक ही अपने छात्र को पूरी लगन और निष्ठा के साथ सही मार्ग पर ले जाने का प्रयास करता है। उसकी गलतियों पर वह उसे प्रेम से सुधार करके सफल राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने हेतु उसे आदर्श शिक्षा प्रदान करता है। प्रतिवर्ष ५ सितम्बर को हमारे देश के पूर्व उपराष्ट्रपति भारत रत्न डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में "शिक्षक दिवस" मनाया जाता है। डॉ० राधाकृष्णन का जन्म दक्षिण मद्रास में तिरुतनी नामक छोटे से कस्बे में 5 सितम्बर सन् 1888 ई० को सर्वपल्ली वीरास्वामी के घर पर हुआ था। सर्वपल्ली राधाकृष्णन महान शिक्षक, आस्थावान, दार्शनिक और भारतीय सँस्कृति के संवाहक के रुप में जाने जाते हैं। एक आदर्श शिक्षक के उनमें सभी गुण विद्यमान थे। सत्य है कि शिक्षक ही बुद्धि और ज्ञान के भण्डार होते हैं। वो शिक्षक ही होता है जो अपने छात्र का मार्गदर्शन करता है और उसके कौशल को विकसित करने में मदद करता है। डाॅ० राधाकृष्णन ने भारतीय सँस्कृति में सभी धर्मों के आदर के साथ ही सभी धर्मों के लिए समानता के भाव के महत्व को भी प्रदर्शित किया। शिक्षा को महत्व देने वाले डॉ० राधाकृष्णन ने स्त्रीशिक्षा की वकालत करते हुए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही थी कि"हमें अच्छी महिलायें दो, हमारे पास एक महान सभ्यता होगी। हमें अच्छी माताएं दो, हमारे पास एक महान देश होगा।" उनकी ये पंक्तियाँ शिक्षक दिवस के अवसर पर याद आ ही जाती हैं। उनकी मान्यता थी कि यदि निष्ठा और लगन के साथ शिक्षा दी जाये तो समाज की अनेक बुराईयों को समाप्त किया जा सकता है। वह निष्काम कर्मयोगी, धैर्यवान, विवेकशील और विनम्र थे। उनका आदर्श जीवन सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। किसी भी राष्ट्र का आर्थिक, साँस्कृतिक और सामाजिक विकास उस देश के शिक्षा पर निर्भर करता है। यदि निःस्वार्थ भाव की प्रेरणा मन में जागृत करके कोई भी कर्म देश के लिए किया जाता है, तब अवश्य ही सफलता मिलती है। शिक्षा राष्ट्र के भविष्य निर्माता कहे जाते हैं, क्योंकि वह अपने छात्रों सही मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन करता है और उसका महत्व भी बताता है।

(मौलिक)
डॉ०विजय लक्ष्मी
काठगोदाम, उत्तराखण्ड

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