मंगलवार, 15 सितंबर 2020

हिन्द की लाचार हिन्दी#सुखदेव टैलर,जी द्वारा शानदार रचना#

हिन्दी दिवस के पावन अवसर पर मेरी स्वरचित कविता व लेख आपकी सेवा में परोस रहा हूँ। 
नोट-  कविता आप तस्वीर में पढे। 

लेख :-"हिन्द की लाचार हिन्दी"

कहने को तो हम हिन्द के हिन्दी है। और भगवान ने हमें बहुत शुद्ध और वैज्ञानिक लिपी और भाषा भी दी है  पर क्या हम इसको सही रुप से सम्भाल पा रहे हैं। कदाचित् नही। क्योंकि आज हम स्वयं ही हिन्दी भाषा को निगल रहे हैं। 
हम हिन्दी को वो स्थान न दिला पाये जो उसके योग्य है।और इसका कारण अंग्रेज या अन्य उतने नही जितने हम है। क्योंकि आज लोग हिन्दी को कम और अंग्रेजी को अधिक तवज्जो दे रहे हैं। आज क्या जब से देश आजाद हुआ है तब से लेकर आजतक सरकारे व हम स्वयं अंग्रेजी भाषा की और दौड़ रहे हैं। और हिन्दी को इस प्रकार छोड़ रहे हैं। जैसे किसी ने हिन्दी को हमारे गले में जबरदस्ती डाल दी। यह अलग बात कि पिछले छः वर्षो में मोदी जी हिन्दी को सम्मान जनक स्थान पर लाने के लिए यथा योग्य प्रयत्न कर रहे हैं। पर क्या यह प्रयत्न देश की स्वतंत्रता के समय से होते आते तो क्या यह आज हिन्दी भाषा के चिंतित बाते हमें लिखना नही पड़ता। और आज हिन्दी भारत में ही नही अपितु पूरे संसार में अपना सम्मानीय स्थान रखती। खेर छोड़ो अब इन बातों को कहने से क्या औचित्य? 
हमें अब भविष्य की तरफ देखना है और यह प्रयत्न करना चाहिए कि किस प्रकार हिन्दी को एक सम्माननीय स्तर पर ले आए। 
मैं अंग्रेजी या अन्य भाषा का विरोध करने या उन्हें त्यागने की बात नही कहता। क्योंकि मैं एक सच्चा भारतीय हूँ। और एक सच्चा भारतीय "वसुधैव कुटुम्बकम्" की विचारधारा का पालन करता है। सो मैं अन्य भाषाओं का सम्मान करता हूँ। लेकिन इसका अर्थ यह नही है कि हम अपनी भाषा को अपमानित करे या उसे छोड़ दे। 
एक बात पुछूँ यदि कोई लड़का जिसे उसकी माँ ने बहुत प्यार से और कठिनाइयों का सामना करके पाला हो। और जब लड़का युवक बन जाए और तब वो किसी अनजान लड़की से प्यार करने लग जाता है और उस से विवाह करके घर लेकर आ जाता है। अब वो अपनी माँ को घर से निकाल देता है। माँ अब दर दर की ठोकरें खा रही है। 
तो अब आप बताए क्या लड़का भविष्य में सुख और  यश  प्राप्त करेगा? अब मैं कदाचित् नही बोलूँगा क्योंकि वो शत प्रतिशत सुख और यश को प्राप्त नही करेगा। 
ठीक यही स्थिति हमारी हिन्दी भाषा की है। आज हम उस लड़के की तरह दूसरी भाषा को घर में ला रहे हैं और एक तरफ हमारी माता हिन्दी को घर से निकाल रहे हैं। तो क्या हम सुख और यश को प्राप्त कर पायेंगे। कदाचित् नही। 

अंग्रेजी से हिन्दी संगर्ष कर रही साथ कुछ स्वार्थी राजनेताओं से भी संघर्ष कर रही है 
वैसे तो हिन्दी भाषा को क्षत्रिय भाषा से कोई खतरा नही है पर आज जो कुछ सता लोभी राजनेता अपनी वोट बैंक के लिए हिन्दी भाषा के खिलाफ द्वेष पैदा कर रहे हैं। जो एक स्वच्छ भारतीय समाज के लिए बहुत घातक है। 

अपनी मातृभाषा से प्रेम होना बहुत गर्व की बात है पर हम हमारी राष्ट्रीय भाषा को अपमानित करना उससे ज्यादा लज्जा की बात है। 
मैं राजस्थानी हूँ मुझे मेरी भाषा से बहुत लगाव है और राजस्थानी भाषा में लिखता भी हूँ बोलता भी हूँ। पर मैं अपनी राष्ट्रीय भाषा हिंदी से उतना ही प्यार करता हूँ। 
इसे आप मेरा अहंकार न समझे। अपितु भाषाओं के प्रति अपना नज़रिया बदले। 
   #सुखदेव_टैलर_निम्बी_जोधाँ

निष्कर्ष :- दूसरी भाषाओं का भी सम्मान करे, पर हिन्दी को उसी के घर से अपमानित करके न निकाले।। 

     मौलिक लेख
✍️सुखदेव टैलर, निम्बी जोधाँ,
     नागौर, राजस्थान

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