रविवार, 6 सितंबर 2020

कवि- खुशवन्त कुमार माली द्वारा रचित बेहतरीन कविता (विषय-लॉक- डाउन में शिक्षकों की स्थिति)

लॉक- डाउन में शिक्षकों की स्थिति
बदलाव मंच
कवि- खुशवन्त कुमार माली
करें कोई शिकायत तो!
शराफ़त ओढ़ लेता हूँ।
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें कोई नफाई तो!
नुकशान सह लेता हूँ।
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें कोई लड़ाई तो!
मैं प्रेम बाँट देता हूँ।
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें कोई हिंसा की झडपें तो!
मैं शान्ति की खड़ग से रोक देता हूँ।
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें कोई लॉक- डाउन तो!
मैं साथ खूब देता हूँ।
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें सितम जो सरकारे तो! 
मैं उफ-आह नहीं करता!
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें स्कूल कोई बंद तो!
मैं अपलक अश्रु से देख लेता हूँ।
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें घर-परिवार कई माँगे!
मैं अन्नपूर्णा बन सब पूर देता हूँ।
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें मुसिबतें हजार वार!
मैं ढ़ाल बन सह लेता हूँ।
मैं शिक्षक हूँ।
न सौदाई,
करें कोई हजारों ख्वाहिशें!
मैं एक रोटी में मन तर कर लेता हूँ।।
करें "राजेश" कोई बहाने हजार तो!
मैं मदद के हाथ को उम्मीद का पैगाम देता हूँ।।

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