बुधवार, 2 सितंबर 2020

कवयित्री शशिलता पाण्डेय जी द्वारा 'क्या है आजादी का मतलब' विषय पर रचना

👩‍🚒"क्या है आजादी का मतलब"?👩‍🚒
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  जश्न मना रहे 74 वीं,
आजादी का।
  पर सच्ची आजादी 
हमे मिली कहाँ?
  थेआजादी के पहले,
त्रस्त हिंदुस्तानी।
  जकड़ गुलामी की
जंजीरों से ।
   शहीदों ने अर्पण कर,
अपना जीवन ।
  दिया अनगिनत,
बलिदान और कुर्बानीयां।
   देशवासी रोज,
मर-मर कर जीते थे 
  ब्रिटिश हुकूमत के,
शोषण से।
   जाने कितनी माँ की,
गोद हुई थी सुनी?
 कर विरोध फिरंगी का,
धन्य हुई जवानी।
चंद्रशेखर, राजगुरु,भगतसिंह की,
आजादी की आहुति में हँसते-हँसते।
फांसी पर झूल गए। 
फिर भी भारतवासी,
उनकी शहादत को भूल गए।
लक्ष्मी बाई अनूठी,
वीरता की पर्याय बनी।
 शांति बोस ने भी फांसी के,
फंदे को गले लगाया।
 सरोजनी नायडू लक्ष्मीसहगल,
सुचेता कृपलानी।
नारी भी कदम से कदम मिला,
आजादी की शान बनी।
जिस विदेशी कपड़ो की,
जलाई भारतीयों ने होली,
उन विदेशियों का माल खरीद,
हम बोल रहे उनकी बोली।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख,
ईसाई ने मिलकर खाई गोली
आज आजाद भारत मे,
होते दंगे हिन्दू-मुस्लिम ।
आजाद भारत में दिखता, 
एक अनोखा मंजर।
अपने ही देश मे विखंडित,
अलग-अलग समुदाय।
अपने ही भाई भोक रहे,
एक दूसरे के पीठ में खंजर,
जगह-जगह लूट पड़ी,
भ्रस्टाचार, झूठ मक्कारी।
 देश के फैली घूसखोरी,
मिलबांट कर होतीं चोरी,
अनपढ़,अयोग्य बैठे लूट के,
धन से ऊँची कुर्सी पर।
पढ़े-लिखे नौजवान लेकर योग्यता भी,
झेल रहे बेकारी।
गुंडे-लफंगों से देश भरा पड़ा,
जीवन भी हुआ असुरक्षित।
ईमानदारी कमजोर बनी,
भ्रटाचारी पूंजीपति बने है भारी,
अव्यवस्था फैली चारो ओर,
कहाँ मिली आजादी?
बात-बात में इंग्लिश बोले,
हिंदी का मतलब लाचारी।
आजादी तो देश छोड़कर ,
संग ले गयें फिरंगी।
बेटी-बहन की अश्मिता,
भी हुआ बचाना भारी।
विवश और लाचार बनी,
अब देश की जनता सारी।
जिन माताओं और बहनों के,
त्याग बलिदानों से।
अंग्रेजो की गुलामी से,
मुक्त हुआ अपना हिन्दुतान।
अपने घर मे कहाँ सुरक्षित बेटी,
देश मे बैठे हैवान?
देश मे आतंक का बोलबाला,
कहाँ आजादी के आसार?
अभी भी स्वतंत्रता के नाम पर,
गुलामी की पड़ती मार।
फिरंगी फुट डालो,राज करो,
नीति का छोड़ गए प्रभाव,
ईष्या और द्वेष के अग्निकुंड में,
जलते शहर और गाँव।
जहाँ पग-पग पर जीवन असुरक्षित,
फिर आजादी कैसी? 
अंग्रेजो के हुकूमत की हमने,
सुनी कहानी जैसी।

🌹समाप्त,🌹
स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
लेखिका -शशिलता पाण्डेय
तिखम पुर बलिया (उत्तर प्रदेश)

 

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