बुधवार, 16 सितंबर 2020

सुहानी भोर#निर्मल जैन 'नीर'जी द्वारा बेहतरीन रचना#

सुहानी भोर...
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हटी कालिमा~
सुगन्धित पवन
छाई लालिमा
सुहानी भोर~
इंद्रधनुषी आभा
है चहुँ ओर
प्रातः वंदन~
मात पिता गुरू को
कोटि नमन
प्रभात वेला~
उषा कालीन दृश्य
है अलबेला
भौर गुँजन~
महकती कलिया
छोड़ क्रंदन
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     निर्मल जैन 'नीर'
   ऋषभदेव/उदयपुर

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