मंगलवार, 29 सितंबर 2020

कवि डॉ. राजेश कुमार जैन जी द्वारा रचना ( विषय-महात्मा गांधी)

सादर समीक्षार्थ
 विषय  -  महात्मा गांधी

 बदलाव मंच राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय साप्ताहिक प्रतियोगिता  2020


महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्तूबर 1869 ई0 में गुजरात में पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। आपके पिता कर्मचंद गाँधी राजकोट के दीवान थे। माता पुतलीबाई धार्मिक स्वभाव की अत्यंत सरल महिला थी। गाँधी जी का पूरा नाम मोहनदास कर्मचंद गाँधी था।
    गाँधी जी के व्यक्तित्व पर उनकी माता के चरित्र की स्पष्ट छाप थी। राजकोट से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कर आप वकालत करने इंग्लैंड चले गए। एक मुकदमे के दौरान आपको दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ भारतीयों की दुर्दशा देखकर आप अत्यंत विचलित हुए और वहीं से आपने मानवता की सेवा करने का व्रत धारण कर लिया। गाँधी जी भारत की पुरातन संस्कृति के परिचायक हैं। वह न केवल भारत अपितु संपूर्ण विश्व के लिए ही प्रासंगिक है। यह सत्य भी है कि विश्व में सभी व्यक्ति प्रेम और अहिंसा की सद्भावना का पालन करते हुए ही शांति के साथ जीवन यापन कर सकते हैं। जीवन की प्रत्येक छोटी- छोटी सी घटनाओं से भी गाँधी जी को समझा जा सकता है। गाँधी जी के विचारों का अनुसरण करने पर ही भारत जगतगुरु की पदवी पर आसीन हो सकता है। गाँधी जी स्वयं में संस्कृति और संस्कार की मूर्ति थे। आज के युग में गाँधी जी के अहिंसा और प्रेम के सिद्धांत विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। गाँधी जी ने सत्य ,अहिंसा, त्याग और प्रेम को अंगीकार किया था। इसलिए उन्हें महात्मा की उपाधि से अलंकृत किया गया था। सत्य को प्राप्त करने के लिए अहिंसा का मार्ग सर्वथा उपयुक्त है।
      गाँधी जी अन्याय के विरुद्ध लड़ने वाले प्रबल योद्धा थे। गाँधी जी के विचार आज भी विश्व का मार्गदर्शन करें रहे हैं और सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करते हैं । महात्मा जी के विचारों का केंद्र बिंदु सत्य एवं अहिंसा रहा है। उनका दृढ़ विश्वास था कि अहिंसा व्यक्तिगत लाभ के स्थान पर संपूर्ण विश्व को लाभान्वित करती है। गाँधी जी का मत था कि अहिंसा कायर का कवच नहीं अपितु साहस शक्ति का उच्चतम गुण है। उनका यह भी मत था कि जो व्यक्ति हिंसा की राह पर चलते हैं वह निश्चय ही विनाश की ओर बढ़ते हैं।    अहिंसा के पथ पर चलते हुए ही परम सत्य की प्राप्ति संभव है । लालची और कायर व्यक्ति कभी भी अहिंसा का पुजारी नहीं हो सकता।
    अहिंसा शूरवीरों का दिव्य आभूषण है। निर्भीक व्यक्ति अहिंसक हो सकता है। शक्तिशाली होने पर भी बल का प्रयोग न  करना और दंड देने की शक्ति होते हुए भी क्षमा प्रदान करना अहिंसा की उपासना है। अहिंसा का सामान्य अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित न किया जाए । अहिंसा प्रेम का पर्यायवाची है। प्रेम में वो शक्ति निहित है जिसकी सहायता से असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
    अहिंसा का अर्थ प्रेम का सागर और वैमनस्य का सर्वथा त्याग है। प्रेम के निकट जाने से क्रूर भाव स्वयँ ही समाप्त हो जाते हैं। सभी व्यक्तियों को साहस, लगन, समर्पण और धैर्य के साथ अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। किसी भी स्थिति में किसी भी व्यक्ति या जीव को कष्ट पहुँचाना नकारात्मक अहिंसा है। सभी जीवों से प्रेम की अनुभूति करना ही सकारात्मक अहिंसा है। 
       डर अथवा भय से अन्याय और अत्याचारों को सहन करना कायरों की अहिंसा है। क्षमा प्रदान करना वीरों का आभूषण है।
       30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर गाँधी जी जैसे महान युग दृष्टा और भविष्य दृष्टा को हमारे बीच से सदा सदा के लिए विदा कर दिया। यद्यपि आज गाँधी जी हमारे बीच नहीं है किंतु उनके आदर्श सिद्धांत सदैव हमारा मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे ।

डॉ. राजेश कुमार जैन
श्रीनगर गढ़वाल
उत्तराखंड

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