रविवार, 27 सितंबर 2020

आपसे हूँ मैं #चंचल हरेंद्र वशिष्ट,नई दिल्ली जी द्वारा बेहतरीन रचना#

' आपसे हूं मैंं '
    27 सितम्बर,2020
आज का दिन है बहुत ही ख़ास!
आज के दिन ही तो इस सांसारिक दुनिया से परिचय हुआ था मेरा और........
और...आंखें खोली थीं तुम्हारी ही गोद में!आज के दिन ही तो मिला था... तुम्हारा स्पर्श, तुम्हारा आंचल और तुम्हारी ममता!

परमपिता परमात्मा को कोटि कोटि नमन!
        अहो भाग्य !  परम सौभाग्य!
साक्षात् ईश्वर की गोद में ख़ुद को पाया
              

तुमने बताया था मुझे......पापा की ख़ुशी का नहीं था ठिकाना....!! 
क्योंकि उन्हें चाहत थी एक बेटी की.....
और वो पूरी भी हुई......बहुत ही भाग्य शालिनी हूं मैं.....!
आप को माता पिता के रूप में पाया,
पापा और तुमने भर भर प्यार लुटाया,
भाइयों से बढ़कर मुझे लाड़ लड़ाया।
अनुशासन और मर्यादा में रहना सिखाया,
संस्कारों और मूल्यों का पाठ पढ़ाया।

उच्च शिक्षा और उन्मुक्त उड़ान दी
मुझे मेरी अपनी एक अलग पहचान दी
अपने सपनों के बिछौने पर सुलाया
विश्वास की थपकी से थपथपाया
सारे जहां की खुशियां कर दी मेरे नाम
सदैव आपका स्नेह आशीष है साथ मेरे
माँ,पापा आपको कोटि कोटि प्रणाम!

 
चंचल हरेंद्र वशिष्ट,नई दिल्ली

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