सोमवार, 21 सितंबर 2020

कवि डॉ. मलकप्पा अलियास जी द्वारा 'ऋणि' विषय पर रचना

मंच को नमन 

मैं ऋणि हूँ 

मैं ऋणि हूँ, 
माता पिता का
मुझे जन्म देकर 
पाला पोसा जिह्नोंने |

मैं  ऋणि  हूँ, 
भाई-बहनों का 
मुझे कभी कष्ट का एहसास 
नहीं कराया जिह्नोंने |

मैं  ऋणि  हूँ, 
दादा-दादी का 
मुझे हर पल 
सहारा बनकर उम्मीदें  
भर दी जिह्नोंने |

मैं  ऋणि  हूँ, मित्रों का,  
दुःख-दर्द में साया  
बनकर साथ निभाया जिह्नोंने |

मैं  ऋणि हूँ धरा का 
मुझे अपनी गोद में 
संभालकर सहनशील का 
पाठ पढ़ाया |

मैं  ऋणि हूँ गुरुजनों का 
सदा प्रेरणादायक बन
तम से निकाल 
ज्योति का दीप जलाके
नया मार्ग दिखाया |
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डॉ.मलकप्पा अलियास महेश बेंगलूर कर्नाटक

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