रविवार, 27 सितंबर 2020

कवयित्री रंजना वर्मा उन्मुक्त जी द्वारा 'बेटी' विषय पर मुक्तक

*मुक्तक*
मात्रा भार -26
1-
 *बेटियाँ*
÷÷÷÷÷÷
माँ-बाप का दिल का टुकड़ा,स्वाभिमान हैं बेटियाँ ।
माँ-बाप की इज्जत और अभिमान हैं बेटियाँ ।
सदा वो खुश रहे, यही देते आशीर्वाद हैं,
सपनों को सच करती वो, अरमान हैं बेटियाँ ।

2-
घर को आबाद करती, बेमिसाल हैं बेटियाँ ।
माँ-बाप का भी रखती खूब ख्याल हैं बेटियाँ ।
बाबुल के घर को पराया मानती ये दुनिया,
क्यूँ करे स्वीकार, पूछती सवाल हैं बेटियाँ ।

              रंजना वर्मा उन्मुक्त

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