बुधवार, 16 सितंबर 2020

वाणी ही व्यक्ति का परिचय कराती है# -डॉ.प्रकाश मेहता जी द्वारा अद्वितीय रचना#

*वाणी ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिचय कराती है..*
*(डॉ प्रकाश मेहता, बेंगलुरु )*
      
*संभव की सीमा जानने* 
           *का केवल एक ही,*
      *तरीका है, कि असंभव से*
        *भी आगे निकल जाना,*
                   *क्योंकि*
       *काेशिश की कलम जब,*
      *काबिलियत की स्याही से*
      *चलती है, ताे सफलता की,*
      *कहानियाँ लिखी जाती है*
                    *मगर*
       *काेशिश की कलम जब,*
   *जुनून की स्याही से चलती है*
    *ताे इतिहास लिखा जाता है...*

*लाख बदल लो आइना,*
*पर चेहरा नहीं बदलता,*
*हथेलियों पर खींचने से लकीरें,*
*मुकद्दर नहीं बदलता,*
*अच्छी सोच से ही बहुत कुछ बदल सकता है,*
*बिना सोचे कुछ नहीं बदलता …।*
*हमारी खुशी हमारी सोच पर निर्भर है।*

*बिना फल वाले सूखे पेड़ पर कभी कोई पत्थर नहीं फैंकता। पत्थर तो लोग उसी पेड़ पर मारते हैं जो फलों से लदा होता है* 🌹
*🙏शख्सियत अच्छी होगी तभी लोग उस में बुराइयाँ खोजेंगे, वरना बुरे की तरफ़ देखता ही कौन है...!!*

*शब्दो का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है !*
*यहा एक शब्द मन्त्र हो जाता है*
*एक शब्द गाली कहलाता है।*
 
*लफ्ज मैं कितने भी खुबसूरत क्यों न लिख दूं,*
*_निखार तो तब आता है जब आप जैसे पाठक रिप्लाई करते है_ 💘*

*बिखरे बिखरे से है मोती चलो माला बनाए।*
*शब्दों के तालमेल से सुंदर वर्णमाला सजाए*
*तारें बनके हम यूँ टिमटिमाएं अंधेरी रातों में,*
*जैसे आसमाँ में कोई दीपक का "प्रकाश" जगमगाए।*
मेरी कलम से✍

-डॉ.प्रकाश मेहता

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