रविवार, 13 सितंबर 2020

कवयित्री- आदरणीय शालिनी कुमारी जी द्वारा सुंदर रचना

मंच को सादर अभिनन्दन.. 🙏🙏
हिंदी दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनायें.. 💐💐

विषय : स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर वर्तमान परिपेक्ष्य में हिंदी का सफर.. 🌹🌹
विधा : गद्य (लेख )

" हिंदी हमारी आन है हिंदी हमारी शान हैं, 
 हिंदी हमारी चेतना वाणी का शुभ वरदान है" ||

 गौरतलब है कि "हिंदी" हमारे देश की मातृभाषा है | मातृभाषा  के गौरव और उत्थान के लिए हम स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर वर्तमान समय तक प्रयासरत रहे हैं | ज्ञान्तव्य  है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात हिंदी को राजभाषा के रूप में 14 सितंबर 1949 को काफी  विचार -विमर्श के पश्चात् संविधान सभा ने एकमत से यह निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा  होगी | इसको प्रतिपादित करने एवं इसे हर क्षेत्र में प्रसारित करने हेतु "राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा" के अनुरोध पर वर्ष 1953 से इसे पूरे भारत में 14 सितंबर को प्रति वर्ष हिंदी दिवस के रुप में मनाया जाने का प्रावधान है | हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने हेतु हिंदी के पुरोधा " व्यौहार राजेंद्र सिंह" ने लंबा संघर्ष किया साथ ही काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, सेठ गोविंद दास, हजारी प्रसाद द्विवेदी आदि साहित्यकारों ने भी अथक प्रयास कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई |
                       हमारे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की अनुच्छेद 343(1) में  यह स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया कि " संघ की राष्ट्रभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी | संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा |" अनुच्छेद 343 (2 ) के अंतर्गत यह भी व्यवस्था की गई है कि संविधान के लागू होने के समय से 15 वर्ष की अवधि तक अर्थात 1965 तक संघ के सभी सरकारी कार्यों के लिए पहले की भांति अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता रहेगा | यह व्यवस्था इसलिए की गई थी कि इस बीच हिंदी ना जानने वाले हिंदी सीख जाएंगें और हिंदी भाषा को प्रशासनिक कार्यों के लिए सभी प्रकार से सक्षम बनाया जा सकेगा  | अनुच्छेद 343 (3) में संसद को यह अधिकार दिया गया कि वह 1965 के बाद भी सरकारी कामकाज में अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखने  के बारे में व्यवस्था कर सकती है |
                     ज्ञान्तव्य है कि ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि राष्ट्रभाषा के रूप में जब हिंदी को चुना गया और इसे लागू किया गया तो गैर - हिंदी भाषी राज्यों के लोग इसका विरोध करने लगे और अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा; जिसके परिणाम स्वरूप हिंदी में भी अंग्रेजी भाषा का प्रभाव दृष्टिगत होने लगा | हिंदी चूंकि जनमानस की भाषा है और भारत के अधिकांश प्रांतों में हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाता है | अतः हिंदी के प्रति लोगों की उदासीनता को दूर कर उन्हें इसके प्रति कर्तव्य का बोध कराने हेतु 14 सितंबर को प्रति वर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है | इसका मुख्य उद्देश्य इस बात से जनमानस को रूबरू कराना है कि जब तक वह हिंदी का उपयोग पूरी तरह से नहीं करेंगे तब तक हिंदी भाषा का विकास संभव नहीं हो सकेगा | इस दिन सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी भाषा का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है | हिंदी दिवस को 14 सितंबर से पूरे सप्ताह तक " राजभाषा सप्ताह" के रूप में मनाया जाता है | जिसमें वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता को बरकरार रखने हेतु विभिन्न प्रतियोगिताएं, काव्य - सम्मेलन, विचार - गोष्ठी, आदि का आयोजन किया जाता है | इसके अतिरिक्त हिंदी दिवस के दिन वर्षभर हिंदी में प्रगतिशील विकास कार्य हेतु पुरस्कारों द्वारा सम्मानित भी किया जाता है,  जिसे हम "राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार" और " राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार" के नाम से जानते हैं | इन पुरस्कारों को प्रदान करने का मूल उद्देश्य हिंदी के प्रति लोगों को जागरूक एवं उत्साहित करना है |
                गौरतलब  है कि " राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार" किसी विभाग, समिति, मंडल आदि को उसके द्वारा हिंदी में किए गए श्रेष्ठ कार्यों के लिए प्रदान किया जाता है | जिसका मूल उद्देश्य सरकारी कार्यों में हिंदी भाषा का उपयोग करने से है | वही " राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार" तकनीकी या विज्ञान के विषय पर लिखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को प्रदान किया जाता है | जिसका मूल उद्देश्य तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में हिंदी भाषा को आगे बढ़ाना हैं  |
                    निष्कर्षतः  अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी भाषा की अनदेखी एवं इसकी विलुप्तता  को रोकने हेतु हर साल 14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस एवं पूरे सप्ताह को " राजभाषा सप्ताह" के रूप में मनाया जाता है,  जिससे राजभाषा हिंदी को गौरवान्वित कर उसे उत्थान की ओर प्रेषित किया जा सके ||

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             शालिनी कुमारी
        शिक्षिका सह बदलाव मंच ईस्ट जोन अध्यक्षा
           मुज़फ़्फ़रपुर ( बिहार)
        
          ( स्वरचित मौलिक लेख)

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