रविवार, 6 सितंबर 2020

बस यात्रा #कवयित्री -शशिलता पाण्डेय जी के द्वारा अद्वितीय रचना#

           🌹बस-यात्रा🌹
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एक बस-यात्रा सा ये जीवन -सफर,
बनकर सवारी जिन्दगी की बस का।
जाना कहाँ तक हमे मालूम नही डगर?
जीवन की बस- यात्रा अनिश्चित,
जाने वो कौन सा गाँव हो या नगर?
जाना कहाँ,नही कुछ निश्चित गंतव्य?
हृदय-पटल पर हर दृश्य करअंकित, 
इस यात्रा को सुखद बनाना ही कर्तव्य।
यादगार -यात्रा की सुनहरी यादे,
संग लेकर सफर में जाना आगे।
सफर का आखरी पड़ाव तो सुनिश्चित,
पर निश्चित कोई समय नही।
बस-यात्रा का अंतिम पड़ाव किस मोड़?
ये रहस्य कोई जानता नही।
सुगम सरल रास्ते कही उखड़-खाबड़।
ये जिंदगी तो है एक बस-यात्रा,
कोई मंजिल भी निश्चित मालूम नही?
बड़ी हसीन है ये सफर जिन्दगी का,
थोड़ी राह मुश्किल तो होगी कही।
यात्रा में होगा साथ भी सहयात्री का,
पर छूट जायें कब साथ मालूम नही?
इस यात्रा में होते रहेंगे हादसे भी,
क्या होगा कब ये किसी को मालूम नही?
सफर में दिखते कभी दृश्य मनोहारी।
कभी खुशियाँ और कभी ग़मो की यात्रा,
कभी रास्ते मे संकटों के दौर भारी।
जिन्दगी की बस-यात्रा का लुत्फ,
जी-भरकर उठाना सफर में चाहिए।
कब खत्म सफर का पड़ावअंतिम ?
सफर का समय  कोई निश्चित नही।
यादगार सफर बना जाइये जीवन का,
समय जालिम कहाँ रुक जायें मालूम नही?
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स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
कवयित्री -शशिलता पाण्डेय

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