मंगलवार, 1 सितंबर 2020

कवि अरविंद अकेला जी द्वारा 'क्या करूं तारीफ उनकी' विषय पर रचना

कविता 

क्या करूं तारीफ़ उनकी
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जबसे उन्हें देखा है मैंने, 
मन मेरा बहकने लगा,
उनका हुस्न है हीं ऐसा,
दिल मेरा धड़कने लगा।

क्या करूं तारीफ़ उनकी,
गजब हैं उसके बाल,
मृगनयनी सी आंखे उसकी,
देखकर मन चहकने लगा।

कोयल सी है उसकी बोली,
गजब के हैं रूप श्रृंगार।
मनमोहक मुस्कान उसकी,
मेरा मन मचलने लगा। 
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           अरविन्द अकेला

1 टिप्पणी:

  1. वाह, बहुत अच्छे।
    वाह, क्या बात है।
    क्या तारीफ़ करूं उनकी ।

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