मंगलवार, 29 सितंबर 2020

कवि निर्दोष लक्ष्य जैन जी द्वारा 'मैं बेटी ही हूँ' विषय पर रचना

                मैं बेटी ही हूँ बेटा तुम्हारा 

     सुनों मम्मी पापा सुनों मेंरा कहना , 
.   ना आँखो मैं एक पल भी आँसू है लाना । 
     सदा मुस्कराना सदा मुस्कराना , 
      सुनों मम्मी पापा सदा मुस्कराना  ॥ 

      मैं अभिमान तुम्हारा तू स्वाभिमान हमारा । 
      सदा मान रखूंगी  पापा तुम्हारा , 
       तू पापा नहीँ परमेश्वर  हमारा   । 
      सुनों जीवन दाता भाग्य विधाता , 
       दिया जो ठिकाना तुमनें हमारा , 
       वो ही पापा अब है संसार हमारा । 
      सदा मान रखूँगी पापा    तुम्हारा । 
      तू पापा है सदा गुमान    हमारा । 
       मैं बेटी ही नहीँ हूँ बेटा तुम्हारा ॥ 

      सदा मम्मी पापा मुझे याद रखना । 
       मैं  बेटी  ही   हूँ   बेटा     तुम्हारा । 
      सुनों मम्मी पापा ये मेंरा है कहना , 
       सदा मुस्कराना सदा मुस्कराना ॥ 

    .  कभी जब मिलनें का मन हो तुम्हारा , 
       तो हल्के से पापा जरा मुस्कराना । 
       पल मे ही पहुँचेगा संदेशा  तुम्हारा , 
       मैं पल पल हूँ पापा हमसाया तुम्हारा । 
       मेरी रग रग मे है  खून तुम्हारा । 
 .    मैं बेटी ही नहीँ हूँ बेटा तुम्हारा .॥ 

      सदा मुस्कराना सदा मुस्कराना ।
      सुनों मम्मी पापा सदा मुस्कराना ॥ 

                       निर्दोष लक्ष्य जैन 
                   25।4।2020  धनबाद 
    फुर्सत के क्षण कुछ अलग 

     


    

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