मंगलवार, 22 सितंबर 2020

प्रभु मूरत#निर्मल जैन 'नीर' जी द्वारा बेहतरीन रचना#

प्रभु मूरत....
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लाड़ लड़ाती~
माँ संतान के लिए 
जान लुटाती
कोई न मोल~
माँ इस दुनिया में
है  अनमोल
ख़ुशी या गम~
माँ का प्यार कभी न
होता है कम
माँ की सुरत~
उसमें छुपी होती
प्रभु  मुरत
करो प्रणाम~
माँ के आँचल में है
चारों ही धाम
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निर्मल जैन 'नीर'
ऋषभदेव/उदयपुर
(राजस्थान)

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