रविवार, 20 सितंबर 2020

कोरोना# -डॉ. प्रकाश मेहता जी द्वारा शानदार रचना#

*अति चिंतनीय विषय, कोरोना को हल्के में लेना पड़ सकता है जीवन पर भारी..!!!* 

*दोस्तों, आज आप से एक बहुत ही महत्वपूर्ण विचार साझा करना है, इस कारण इस आर्टिकल को बहुत ही ध्यान से पढ़ियेगा..!!!*
*कोविड 19 (कोरोना वायरस) "वैश्विक महामारी" अब भयानक रूप धारण कर प्रतिदिन हर घर में पैर पसार रही है, आज स्थिति यह है कि परिवार के सदस्य अंतिम क्रिया में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं।* 
अस्पतालों में पलंग उपलब्ध नहीं हैं। जयपुर के मशहूर सर्जन डॉ दिनेश जिंदल को कोरोना संक्रमित होने के बावजूद *तीन दिन तक SMS अस्पताल में "पलंग व वेंटिलेटर" नहीं मिला।* ता: 16.09.2020 को उन्होंने उपचारित निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। आपका कमाया हुआ धन काम नहीं आ रहा है। जिन परिवारों ने अपने किसी सदस्य को खोया है उनको, उनके दुःख मे सम्मिलित होकर दिलासा देनेवाला कोई नहीं है। 
*कष्ट हमे बहुत कुछ सिखाता है परन्तु होश में अवश्य आना चाहिए ठोकर खाने के बाद।*

*संक्रमित सदस्य के पास चाहते हुए भी सेवा करने से घबराहट होती है।* 
*इतना सब देखकर भी हम सभी खामोश हैं? क्या हम सभी इससे भी अधिक भयानक स्थिति का इंतजार कर रहे हैं?*
जो लोग कोरोना को हल्के में ले रहे हैं वो समझ जाए, जिसका घर ऊजडता है, उसे मालूम है कि किस तरह से यह जीवन को वीरान कर देता है। ईश्वर आगे किसी के साथ ऐसा न करे, इसके लिए हम सबको आने वाले समय में बहुत ही ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है, अब केवल सावधानी में ही हमारा एवं बच्चों का भविष्य सुरक्षित है।
 हम सभी को एक कठोर निर्णय लेना पड़ेगा। हमें विगत दिनों की तरह  *लॉक डाउन* के समय में जो भी नियम सरकारी गाइड लाईन के तहत पालन करते थे, वह अब हमें और अधिक कठोरता से पालन करने होंगे। अन्यथा संक्रमण से कोई नहीं बच पायेगा। *हम रहेगें तभी हमारा व्यापार, पैसा, परिवार और समाज सुरक्षित रहेगा।*

*समय कठिन है*
*अनावश्यक इच्छाएँ*
*अनावश्यक विचार*
*अनावश्यक योजनाएँ..*
*इनसे जितना हो सके बचे*
*सिर्फ़ ओर सिर्फ़ वर्तमान में* *जिए,*
*ओर भविष्य अच्छा* *होगा इस विचार* *को मज़बूत* *कीजिए।*

*मेरे लिखे गए शब्द मार्मिक हैं, किंतु कटु सत्य है...*
*कोरोनाकाल में स्थिती की भयावहता यहां तक आ गई है कि इंदौर के एक बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच की मॉर्चुरी में करीब 10 दिन से स्ट्रेचर पर रखा शव सड़ गया।* शव में कीड़े लग गए और अंतिम संस्कार के इंतजार में कंकाल बन गया। (मृत्यु का कारण अज्ञात है )
*आइएमए की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में अब तक 382 डॉक्टर कोरोना से जान गंवा चुके हैं।* 

कोरोना संक्रमण अब छलांगें मारने लगा है। यह विश्व के विभिन्न देशों के लाखों लोगों की जान ले चुका है। आज देश में प्रतिदिन 24 घण्टे में *नए संक्रमितों की संख्या 1लाख के आंकड़े को छू रही है, इसके लिए "सरकार की अदूरदर्शिता व लापरवाहियां" तो बड़ा कारण है ही, आम आदमी का अति आत्मविश्वास या कहें मुझे कुछ नहीं हो सकता का "अहम व वहम" इस रोग के अत्यधिक तेजी से संक्रमण में सबसे ज्यादा सहायक है।*
*आज सरकार अर्थव्यवस्था को गति देकर अपना खजाना भरने के लिए सभी चीजें "अनलॉक" कर रही है।* परन्तु यह साल कमाने का नहीं है। परिवार को बचाने की खुली चुनौती है। *हमारे बच्चे सरकार के लिए "जनसंख्या" मात्र हैं, परन्तु हमारे लिये वह घर का चिराग है। उनकी रक्षा करना हमारा दायित्व है।* बेशक अपनों के लिए दोनों हाथों से प्रार्थना कीजिए लेकिन साथ ही सुरक्षा के लिए प्रयत्न भी कीजिए।

 पेश है, इसी संदर्भ में *गुलजार साहब* की कुछ मशहूर पंक्तियां...
*बे वजह घर से निकलने की जरूरत क्या है, मौत से आंखें मिलाने की जरूरत क्या है।*

*सब को मालूम है बाहर की हवा है कातिल, यूंही कातिल से उलझने की जरूरत क्या है।*

*जिंदगी एक नेमत है उसे सम्भाल के रखो, कब्रगाहों को सजाने की जरूरत क्या है।*

*दिल बहलाने के लिए घर में वज़ह है काफी, यूंही गलियों में भटकने की जरूरत क्या है।*
अतः सभी से करबद्ध👏 निवेदन है कि अत्यन्त जरूरी हो तभी घर से सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित बाहर निकलें।
*लगता था जिन्दगी को*...
      *बदलने में वक्त लगेगा*...
         *पर क्या पता था*...
         *बदला हुआ वक्त*...
        *जिन्दगी बदल देगा.*...!

*इन्हीं विचारों के साथ...*
*कहता है "प्रकाश" ✍*
*लौट आयेगी खुशियाँ सभी की* 
*अभी कुछ गमो का शोर है* 
*ज़रा संभलकर रहे दोस्तों,* 
*ये इम्तिहान का दौर है।*
*अपनी ऊर्जा खुश रहने में ही खर्च कीजिए...*
*क्योंकि ख़ुशी से ही आपकी इम्युनिटी बढ़ती है, वरना यही हाल होगा कि सारी उम्र किसी ने जीने की वजह तक नहीं पूछी...*
*लेकिन मौत वाले दिन, सब ने पूछा कि कैसे मरा..???*

  -डॉ. प्रकाश मेहता

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