रविवार, 6 सितंबर 2020

गौ वंश को बचाना है #बाबूराम सिंह कवि जी के द्वारा शानदार रचना#

🌾गौ वंश को बचाना है 🌾
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जन-जन धीर-वीर क्षीर से बना गम्भीर ,
पुष्ट   करी   हीर   पीर   हर  लेती प्यार से।
प्यार  व  दुलार  शुभ श्रध्दा -स्नेह शुचि ,
नेहनव  नित  लाती  गेह  दुग्ध  धार से ।
प्रतिभा  प्रखर  नेक  नियत  नजर शुध्द ,
बुध्दि -बल विवेक देती सेवा सत्कार से।
गंगा जस पावन गोमाता " कवि बाबूराम "
पूँछ   से  उबारे   भव  वैतरनी  धार से।


देके बाछा- बाछी -बैल गोधन क्षीर सुधा ,
सुअन्न अनूठा सुख शान्ति को बढा़ती है।
परहित  , परमार्थ , परोपकार   में सदा ,
तिल -तिल होम कर स्वयं मिट जाती है।
पावन मल -मूत्र से इलाज कर रोगों का ,
सर्व  सुख भोगों से सृष्टि  को सजाती  है।
विमल विचार सत्य सार " कवि बाबूराम "
प्यार  अपनत्व  जन - मन  में जगाती  है।

ब्रह्मा  विष्णु  महेश  शेष  शारदा दिनेश ,
सर्व   देवों  को   रोम - रोम में बसाती  है।
चौदह   भुवन  ब्रह्माणड  त्रिलोक पूज्य ,
माताओं की माता कामधेनु कहलाती है।
कीजै गऊ सेवा वेद शास्त्र व पुराण कहे,
मानव   जीवन   श्रेष्ट   सुफल बनाना है।
मुक्ति दायिनी है गऊ माँ कवि बाबूराम ,
प्राण देके प्राण गऊ वंश को बचाना है।

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बाबूराम सिंह कवि 
बड़का खुटहाँ , विजयीपुर 
गोपालगंज ( बिहार )841508
मो0नं0 - 9572105032
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