सोमवार, 31 अगस्त 2020

कवि बाबूराम सिंह जी द्वारा 'क्यों कहते हो कुछ पास नहीं है' विषय पर रचना

क्यों कहते कुछ पास नहीं है
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साधन धाम मोक्ष व्दार है क्या तुमको आभास नहीं है।
सर्वोपरि है मानव जीवन क्यों कहते कुछ पास नही है।
सतकय धर्म सत्कर्म मानवता से जीवन को जीना सीखो ,
पुरुषार्थ कर्म ही पूजा जीवन भोग विलास नही है ।
भक्ति भाव भजन भगवन का है भवपार लगानेवाला ,
स्वार्थ छोड़ परमार्थ से जुडो यहाँ अपना कुछ खास नही है।
जीना-मरना आना-जाना मृत्युलोक है लगा रहेगा,
उसका जीना व्यर्थ ही जग में जिसका कुछ इतिहास नही है।
काया माया अन्त घटेगा कुछ भी साथ। नही जायेगा ,
जागरुक हो जतन को जीवन का पल आभास नही है।
परहित प्यार के पावन पथ पै प्रियतम परमेश्वर मिलते ,
वो क्या जाने जिसके उर में पिया मिलन की प्यास नही है।
प्रभुभक्ति के पावन पथ पै कम खा गम खा आगे बढ़ना,
हरि केपास रहा जो सर्वदा अग जग में उदास नही है।
वाणी के दोष दाग जगत में झुठ अनावश्यक कटु निन्दा ,
व्यर्थ वाणी को "बाबूराम कवि "क्यों कहते बकवास नही है।

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बाबूराम सिंह कवि 
बड़का खुटहाँ , विजयीपुर 
गोपालगंज ( बिहार )841508
मो0नं0 - 9572105032
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