सोमवार, 3 अगस्त 2020

प्यार का बंधन "रक्षाबंधन"

मंच को नमन
विषय-रक्षा बंधन/ प्यार का बंधन

है  जग  में  सबसे  न्यारा  रक्षाबंधन
पावन  भाई  बहन  का  प्यारा  बंधन
 
लताएं लिपट वृक्ष से करती हैं वंदन
सावन  की  बूंदें  करती  हैं  अभिनंदन
हरित चुनरी ओढ़ के धरती मुस्काए
 बरखा  फूलों  का  हर्षित  करती   है मन

मस्त  गीत  मल्हार  गाता  रक्षाबंधन
है  जग  में  सबसे  न्यारा  रक्षाबंधन

मिलकर सखियों  के  संग  झूला  झूले
इक  दूजे  की  बातें  सुन  शरमाए  गूलें
तन की गंध पवन ले  दे प्रिय का संदेश
रिमझिम रिमझिम बूंदों में सुधबुध  भूले

नभ  करता  स्वागत  आया   रक्षाबंधन
है  जग  में  सबसे  न्यारा   रक्षाबंधन

स्वर्णाक्षरों  में  अंकित  इसका  इतिहास
करें गुणगान तुलसी केशव और ब्यास
कच्चे  धागे  का  बंधन  कभी  न  टूटा
सप्तरंग बिखेरे इंद्रधनुष भर उल्लास

होता निर्मल सरिता जैसा रक्षाबंधन
है  जग  में  सबसे  न्यारा  रक्षाबंधन
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मैं घोषणा करता हूं कि यह रचना मौलिक स्वरचित है।
भास्कर सिंह माणिक (कवि एवं समीक्षक) कोंच, जनपद-जालौन, उत्तर-प्रदेश-285205

Badlavmanch

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