मंगलवार, 25 अगस्त 2020

कवि निर्मल जैन 'नीर' जी द्वारा मुकद्दर विषय पर रचना

मुकद्दर.....
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भाग्य प्रबल~
सितारे गर्दिश में
मिले सम्बल
टूटे सपने ~
बदली तकदीर
रूठे अपने
सुन इंसान~
ये मुकद्दर होता
है बलवान
जीवन मर्म~
किस्मत के भरोसे
छोड़ न कर्म
गज़ब खेल~
जाने कब किससे
हो जाये मेल
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     निर्मल जैन 'नीर'

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