रविवार, 9 अगस्त 2020

ज़हरीले फ़ूल

🌹ज़हरीले फूल🌹
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रंग-रंगीले खूबसूरती का प्रतीक।
अनमोल कृति प्रकृति का फूल,
बनाते खिलकर खूबसूरत चमन,
खुश्बू चमन में बिखराते अनेक।
बनते शोभा मंडपों की बन तोरण,
मुस्कुराते देव के मस्तक पर चढ़।
सुन्दर धतूरे का फूल भी होता मगर,
शोभित महादेव के मस्तक,लेकिन जहर।
खूबसूरती कोई भी देती भले सुकून,
सौंदर्य का महत्व होता हमेशा आंतरिक ।
खुश्बू बिखरते फूलों से महकता चमन,
घर के गमले सजा कर रखते कर जतन।
खिलता धतूरा  जंगलों झाड़ियों में,
गंधहीन पुष्प बन गरल दूषित करे पवन।
जो ले किसी की जिंदगी, भले हो खूबसूरत,
अनमोल कचरे की तरह रहता कही पड़ा।
कड़वा होता नीम का फूल भी लेकिन,
बन कर औषधि जीवन में लाता खुशहाली बड़ा।
खूबसूरती अगर खिले बनकर पुष्प जहरीला,
दूर फेंक देते उसे जड़ से उखाड़ कर।
जंगल झाड़ियों में खिलते खुश्बू रहित फूल,
निर्माण को औषधि ढूढ़े जाते भटक कर ।
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🌹समाप्त🌹 स्वरचित और मौलिक
                       सर्वाधिकार सुरक्षित
कवयित्री:-शशिलता पाण्डेय
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