रविवार, 30 अगस्त 2020

कवि अनुराग बाजपेई जी द्वारा रचना

लुटे बैठे हैं बेजां हम,
तुम्हें कुछ हम बताते तो।

क्यों ऐसे होंठ सी बैठे,
कभी तुमसे जताते तो

वो होठों की खामोशी थी,
जो मुझको हर पल जलाती है।

तेरे पहलू में बस जाते,
ज़रा सा मुस्कुराते तो।

लुटे बैठे हैं बेजां हम,
तुम्हें कुछ हम बताते तो।

अनुराग बाजपेई (प्रेम)
८१२६८२२२०२

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