सोमवार, 3 अगस्त 2020

आज़ादी : "तिलक गौखले ने जन जन में स्वत्व जगाया था।" "राष्ट्र भक्ति का घर-घर में दिव्य दीप जलाया था।।"

*बदलाव मंच द्वारा आयोजित काव्य मिश्रित भाषण प्रस्तुति*
        *गद्य*
15 अगस्त 1947 के दिन का नाम लेते ही हृदय में उत्साह उमंग की भावना उत्पन्न हो जाती है।
रोम रोम में आग लगने लगती है। इसीलिए हमारे भारत मे रहने वाले स्वतंत्रता की क्रांति में हमारे देश के संपूर्ण जाति वर्ग भिन्नता को मिटाकर संपूर्ण देश में एक साथ क्रांति का राग अलापा जिसमें किसी ने कुछ ना देखा कुछ न सोचा केवल और केवल एक ही मार्ग चुना और वह था स्वतंत्र भारत जब भारत आजाद हुआ तब भारत की स्थिति गंभीर थी 15 अगस्त 1947 को भारत देश आजाद हो गया परंतु फिर भी मन में यह विचार आता है कि क्या यह स्वतंत्रता हमें किसी व्यक्ति के स्वभाव के कारण या किसी व्यक्ति के नंबर अभाव के कारण मिली है या किसी व्यक्ति के अंग्रेजों के सानिध्य में झुक जाने से मिली है परंतु सत्यता को यदि हम जानकर उसका अध्ययन करेंगे तो हमें पता चलेगा की हमें जो सूचना प्राप्त हुई है वह केवल आंदोलन दांडी मार्च नमक आंदोलन जल सत्याग्रह आदि आदि आंदोलनों से प्राप्त नहीं हुई उसके लिए हमारे देश के महान वीरों ने अपने प्राणों की आहुति या तकदी तब जाकर या देश स्वतंत्र हो पाए हमारे देश में पढ़ाया जाता है कि दे दी हमें आजादी बिना खड़क बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल यह गीत आज भी दोहराया जाता है स्वतंत्रता प्राप्ति में हमारे देश के प्रथम राष्ट्रपति जिन्हें कहा जाना चाहिए ऐसे पूजनीय मोहनदास करमचंद गांधी के द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई उन्होंने देश को आजादी कराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब तक वे जीवित रहे तब तक जितना उन्होंने किया रास्ते के लिए वह हमारे लिए गौरव की बात है हमारे देश में आज भी उनके नए-नए चर्चे व्याख्यान होते रहते हैं क्योंकि वह हमारे प्रथम राष्ट्रपति कहे जाना चाहिए उन्हें क्योंकि यह भारत मां का दर्जा जिसे दिया गया है कोई व्यक्ति इस भारत मां का प्रतीक नहीं हो सकता इसलिए हम उन्हें किसी भी प्रकार से राष्ट्रपिता नहीं अभी तो हम राष्ट्रपति पद से सम्मानित करना चाहिए ऐसी महत्वपूर्ण स्वतंत्रता में परम पूजनीय महात्मा गांधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस उधर लाल बहादुर शास्त्री भगत सिंह राजगुरु चंद्रशेखर आजाद इन महान वीर बकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जिन्होंने वंदे मातरम गीत की रचना की ऐसे महान वीरों ने इसे प्रस्तुत किया और आजादी का प्रस्ताव अंग्रेजों के सामने रखा और हमारा देश आजाद और बड़ी खुशियों के साथ हमने आनंददायक बात को लेकर लाल किले से प्रथम बार वेद कबूतर उड़ाना प्रारंभ किया आज भी स्वतंत्रता के इस शुभ अवसर पर  बड़े धूमधाम से खुशियों के साथ स्वतंत्रता दिवस को आनंददायक पूर्ण तरीके से मनाते हैं इस 73 वें गणतंत्र दिवस की आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं और बधाई क्योंकि यह शौर्य और पराक्रम के लिए और स्वाभिमान जगाने के लिए मनाया जाता है ताकि हम इस दिन को याद कर पाए कि हमारा देश आज ही के दिन आजाद हुआ है साथी आने वाली समूची वीडियो को यह अवगत करा सके कि हमारा देश सन 1947 में आजाद तो हो गया परंतु मानसिक गुलामी से वर्तमान में भी जूझ रहा है क्योंकि आज स्वतंत्र जिस प्रकार से हमें प्राप्त होनी चाहिए वह हमें है नहीं और वह सफलता को प्राप्त करने के लिए आत्मनिर्भर भारत की वर्तमान में आवश्यकता पड़ती है इसलिए मैं कहना चाहते हो की हमारे देश में स्वतंत्रता को प्राप्त हो गई देशभक्ति की भावनाएं जाग गई राष्ट्रभक्ति की भावना जाग गई परंतु समूल हिंदू समाज और इस राष्ट्र को एक साथ एक मंच पर कोई जाति वर्ग भिन्नता नहीं केवल और केवल राष्ट्रभक्ति में आज डूबने की आवश्यकता है संपूर्ण स्वतंत्र विदेशी आक्रमणकारियों ने बनाने के लिए क्या क्या षड्यंत्र नहीं रचे।
 आज भी वे ऐसे षड्यंत्र रचने में लगे हुए है।

*पद्य*


ये मेरा भारत महान जब आजाद हुआ है।
उनके परखच्चे उड़ गए जिसने छुआ है।।

अमर पुत्रों ने भारत माता पर अपने प्राण गवाएं।
हंसते हंसते झूले फंदे पर राष्ट्रगीत जमकर गाए।।

तिलक गौखले ने जन जन में स्वत्व जगाया था।
राष्ट्र भक्ति का घर-घर में दिव्य दीप जलाया था।।

भारत माता के बेटों के वंदे मातरम गाना पड़ा।
गौरे गौरे घोड़ों को मेरा भारत छोड़कर जाना पड़ा।।

चाल चल न पायी शत्रु पक्ष बेरियों की इस धरती पर।
खूब पापड़ बेले मुह की खानी पड़ी इस धरती पर।।

मंगल पांडे की ताकत का था अंग्रेजो को इनका ध्यान नही।
जो भारत माँ की जय न बोले उनका कोई सम्मान नही।।


जो थे चाटुकार उन्होंने अंग्रेजो के तलवे चूम लिए थे।
भगत सुखदेव गुरु ने फांसी के फंदे के चूम लिए थे।।


जैसे हवन यज्ञ में प्राण रूप आहुति दे दी।
मातृभूमि पर मां बहनों ने चिराग की आहुति दे दी।।

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        गीता पांडे 
रायबरेली ,उत्तर प्रदेश

Badlavmanch

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