शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

बेवजह#

बेवजह

बेवजह हमारा यूँ खिलखिलाना।
उनका दिल में दस्तक दे जाना।।
रातों को नींद पर डाका डालना।
तकिये से सिमटकर बतियाना।।
आखिर सब बेवजह ही तो है।
आखिर सब बेवजह ही तो है।।

बेवजह आइने में मेरा निहारना।
अपने आपमें उनको महसूस करना।।
छोटी छोटी नादानियॉं करना।
पुरानी बॉंते सोच सोचकर हँसना।।
आखिर सब बेवजह ही तो है।
आखिर सब बेवजह ही तो है।।

हीरल

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